वाशिम कस्टोडियल डेथ मामला: 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा
रिसोड पुलिस स्टेशन की कोठड़ी में 2011 में हुई बेंग्या पवार की मौत पर जिला सत्र न्यायालय ने 15 साल बाद सुनाया ऐतिहासिक फैसला।

तस्वीर में वाशिम जिला व सत्र न्यायालय की इमारत का मुख्य प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा है, जिसके ऊपर 'जिल्हा व सत्र न्यायालय वाशीम' लिखा हुआ है।
जिले के रिसोड पुलिस स्टेशन की कोठड़ी में बेंग्या पवार की मौत के बहुचर्चित मामले में वाशिम जिला सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन थानेदार सहित 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह निर्णय लगभग 15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आया, जिससे पवार परिवार को अंततः न्याय मिला है।
घटना वर्ष 2011 की है, जब रिसोड पुलिस ने हिंगोली जिले के सेनगांव तहसील स्थित वाढवणा गांव की पारधी बस्ती से 20-22 वर्ष आयु वर्ग के दो युवकों बेंग्या पवार और राजू पवार को कथित चोरी के मामले में रात के समय हिरासत में लिया था। इसके बाद 2 मई 2011 को बेंग्या पवार की पुलिस कोठड़ी में ही मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 42 चोटों के निशान पाए गए थे, जिससे मामले ने गंभीर रूप ले लिया था।
मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार आवाज उठाए जाने के बाद सीआईडी जांच कराई गई, जिसके आधार पर तत्कालीन थानेदार सहित कुल 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद जिला सत्र न्यायाधीश जयसिंग झपाटे ने 2 जुलाई को निर्णय सुनाते हुए तत्कालीन थानेदार महादेव माणिक धांडे, पुलिस कर्मचारी मदन केशव पवार, शिवाजी नामदेव खिल्लारी, पंजाब माणिकराव पाटकर, रमेश सीताराम पवार, प्रकाश हिरालाल तारम, नागोराव भगवान खांडके, अशोक निवृत्ती वैद्य और वसंत कणिराम जाधव को उम्रकैद की सजा सुनाई।
इस प्रकरण में सरकारी वकील के रूप में एडवोकेट अभिजीत व्यवहारे और एडवोकेट श्रीराम काळू ने पैरवी की। अदालत के इस फैसले के साथ ही 15 वर्षों से लंबित इस संवेदनशील पुलिस कस्टडी मृत्यु मामले का अंत हुआ, जिसने न्याय व्यवस्था में जवाबदेही और गंभीरता का महत्वपूर्ण संदेश स्थापित किया है।
मेटा विवरण (Meta Description):
वाशिम जिले के रिसोड पुलिस कोठड़ी मृत्यु मामले में जिला सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन थानेदार सहित 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। 2011 में बेंग्या पवार की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी, शरीर पर 42 चोटें मिली थीं। 15 वर्ष बाद पवार परिवार को न्याय मिला।

Sunil Kambale, Wasim(Maharashtra)
नाम: सुनील कांबले
पद: संवाददाता (प्रातकाल)
कार्यक्षेत्र: वाशिम जिला (महाराष्ट्र)
बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, और प्रशासन
विशेषज्ञता: जिला स्तरीय रिपोर्टिंग, विकासात्मक एवं सकारात्मक पत्रकारिता
परिचय
सुनील कांबले महाराष्ट्र के वाशिम जिले के एक बेहद वरिष्ठ, प्रतिष्ठित और अनुभवी पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातकाल' के संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुनील जी वाशिम जिले में आकाशवाणी स्तर और जिला स्तर की सभी प्रकार की न्यूज़ रिपोर्टिंग की कमान संभालते हैं। पत्रकारिता जगत में वह अपनी सकारात्मक सोच के लिए जाने जाते हैं; उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों को उजागर करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली खबरों को प्राथमिकता देना है। स्थानीय समाचारों से लेकर राजनीति और प्रशासनिक गलियारों की हर बड़ी हलचल पर उनकी गहरी पकड़ है।
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सुनील कांबले जी को पत्रकारिता और मीडिया के अलग-अलग माध्यमों (ब्रॉडकास्ट, डिजिटल और प्रिंट) में काम करने का दशकों लंबा अनुभव है:
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