महाराष्ट्र के वर्धा जिले के समुद्रपुर तहसील के पाठर गांव में स्थित श्री सिंधी माता मंदिर सैकड़ों वर्षों से आसपास के क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। करीब 900 की आबादी वाले इस गांव को मंदिर के कारण धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान मिली है। प्राचीन लोकपरंपराओं, भक्तों की अटूट श्रद्धा, धार्मिक उत्सवों और अन्नदान की परंपरा के कारण यह देवस्थान आसपास के गांवों में भी परिचित है।

स्थानीय लोकपरंपरा के अनुसार, पहले मंदिर के सामने सिंदी का एक पेड़ था, जिस पर अक्सर सांप दिखाई देते थे। इस कारण ग्रामीणों के मन में इस स्थान के प्रति विशेष श्रद्धा उत्पन्न हुई। समय के साथ यह स्थान सिंधी माता के पवित्र धाम के रूप में पहचाना जाने लगा। भक्तों के बीच सिंधी माता को मन्नतें पूरी करने वाली देवी के रूप में मान्यता प्राप्त है।

यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नत मांगते हैं और मनोकामना पूरी होने की श्रद्धा के साथ मंदिर में अन्नदान करते हैं। इस तरह देवस्थान में भक्ति, सेवा और दान की परंपरा देखने को मिलती है।

मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि यहां सिंधी माता की मूर्ति के साथ भगवान शिव की मूर्ति भी स्थापित है। इस कारण यह मंदिर सिंधी माता और भगवान शिव के संयुक्त आस्थास्थल के रूप में श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

गांव की आस्था के प्रतीक इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया है। वर्तमान में यहां बना भव्य मंदिर ग्रामीणों की श्रद्धा, एकजुटता और धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है। मंदिर में पिछले 40 वर्षों से महाशिवरात्रि मेले के आयोजन की परंपरा चली आ रही है। वहीं, पिछले 20 वर्षों से नवरात्रि उत्सव भी बड़े उत्साह और भक्तिमय वातावरण में मनाया जा रहा है।

नवरात्रि के दौरान सिंधी माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा-अर्चना, धार्मिक कार्यक्रमों और सामूहिक सहभागिता के कारण पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। यह आयोजन मंदिर की धार्मिक परंपरा और स्थानीय लोगों की आस्था को दर्शाता है।

देवस्थान के विकास में हिंगणघाट विधानसभा क्षेत्र के विधायक समीर कुणावार का योगदान भी महत्वपूर्ण बताया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर में विभिन्न विकास कार्यों के लिए अब तक करीब 30 लाख रुपये की निधि उपलब्ध कराई गई है। उनके सहयोग से मंदिर के विकास को गति मिली और देवस्थान में विभिन्न सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिली।

सैकड़ों वर्षों की लोकश्रद्धा, महाशिवरात्रि मेले की 40 वर्ष पुरानी परंपरा और पिछले 20 वर्षों से आयोजित नवरात्रि उत्सव के कारण पाठर का श्री सिंधी माता मंदिर आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

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