वर्धा के 7 तालुका सूखाग्रस्त घोषित, कारंजा को शामिल करने की मांग
एल नीनो से फसलों को भारी नुकसान के बाद वर्धा में सात तालुका सूखाग्रस्त घोषित, सरपंच संगठन ने कारंजा को शामिल न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

वर्धा में जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने के बाद एक साथ खड़े सरपंच संगठन के पदाधिकारी।
वर्धा जिले में सूखे के संकट के बीच सरपंच संगठन की मांग को बड़ी सफलता मिली है। जिले के आठ में से सात तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद जिला सर्व प्रथम सरपंच संगठन ने शासन और लोकप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। हालांकि कारंजा तालुके को सूखाग्रस्त तालुकों की सूची से बाहर रखा गया है। संगठन ने अब कारंजा को भी सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग करते हुए ऐसा नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
समुद्रपुर: इस वर्ष देश पर पड़े एल नीनो के प्रभाव का वर्धा जिले के सभी आठ तालुकों में असर हुआ है। कम बारिश का सबसे अधिक फटका किसानों को लगा है। दुष्काल के संकट में फंसे किसानों को राहत देने के लिए वर्धा जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर आर्थिक सहायता देने की मांग जिला सर्व प्रथम सरपंच संगठन की ओर से जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र राऊत के नेतृत्व में पालकमंत्री पंकज भोयर, आमदार समीर कुणावार, आमदार सुमित वानखेडे और आमदार राजेश बकाने से की गई थी।
लोकप्रतिनिधियों ने इस मांग का तत्काल संज्ञान लेते हुए जिले के आठ में से सात तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके लिए सरपंच संगठन की ओर से सभी लोकप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया गया है। हालांकि कारंजा तालुके को इसमें शामिल नहीं किया गया है। संगठन ने कारंजा तालुके को भी सूखाग्रस्त तालुकों में शामिल करने की मांग की है।
वर्धा जिले के सभी आठ तालुकों में एल नीनो का प्रभाव पड़ा है। इसका बड़ा असर किसानों के खेतों में लगाई गई कपास, सोयाबीन, तुअर और सब्जियों की फसलों पर हुआ है। कपास की फसल की वृद्धि रुक गई है। वहीं कई किसानों की सोयाबीन फसल में एलोमोझाक रोग का प्रकोप होने से फसल पीली पड़ गई और फलियां भर नहीं पाई हैं। इसके कारण किसान एक बार फिर आर्थिक संकट में फंस गया है। किसानों को इस संकट से बाहर निकालने के लिए सूखा घोषित कर आर्थिक सहायता देने की आवश्यकता है।
बारिश कम होने के कारण जमीन में पर्याप्त पानी का निचरा नहीं हुआ है और पानी का स्तर कम हो गया है। इसके चलते इस वर्ष ठंड के दिनों में कई गांवों में पानी की कमी पैदा होने की आशंका है। इसी को देखते हुए सरपंच संगठन की ओर से पालकमंत्री पंकज भोयर, आमदार समीर कुणावार, आमदार सुमित वानखेडे और आमदार राजेश बकाने से इस विषय को गंभीरता से लेते हुए अन्य तालुकों की तरह वर्धा जिले के सभी आठ तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए सरकार और शासन के पास प्रयास करने तथा किसानों को संकट से राहत दिलाने की मांग की गई थी।
मांग का संज्ञान लेते हुए वर्धा, देवली, आष्टी, आर्वी, सेलू, हिंगणघाट और समुद्रपुर इन सात तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। हालांकि जिले के कारंजा तालुके को इससे बाहर रखा गया है। संगठन की ओर से मांग की गई है कि कारंजा तालुके को भी सूखाग्रस्त तालुकों में शामिल किया जाए। ऐसा नहीं होने पर सरपंच संगठन की ओर से उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।
सात तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने पर सरपंच संगठन की ओर से जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र राऊत, जिला प्रसिद्धि प्रमुख विलास नवघरे, जिला उपाध्यक्ष राजेश सावरकर, जिला उपाध्यक्ष मुरलीधर चौधरी, जिला सचिव संजय ढुमणे, किशोर नेवल, जिला सहसचिव सतीश ठाकरे, तालुका अध्यक्ष कीर्ति सवाई, विजय तडस, नामदेव राऊत, दामिनीताई डेकाटे, ज्योतिताई घंगारे, संतोष सेलूकर, अरुण सायकार, देवेंद्र बोके, जगदीश वडतकर सहित सरपंच संगठन के पदाधिकारी, सरपंच और प्रशासकों ने शासन एवं लोकप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया है।

Pratahkal Bureau
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