वर्धा में नहर का पानी नहीं मिलने पर किसानों का अल्टीमेटम, अतुल वांदिले करेंगे आंदोलन
वर्धा जिले के समुद्रपुर और हिंगणघाट तहसील के कई गांवों में नहर का पानी नहीं मिलने से कपास, अरहर और चने की फसल पर संकट है। अतुल वांदिले ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूरे जिले में आंदोलन की चेतावनी दी है।

वर्धा जिले के समुद्रपुर और हिंगणघाट में नहर का पानी न मिलने से फसलों पर मंडराते संकट को लेकर प्रशासन को चेतावनी देते एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के जिलाध्यक्ष अतुल वांदिले।
वर्धा जिले के समुद्रपुर और हिंगणघाट तहसील के कई गांवों में किसानों को सिंचाई के लिए नहर का पानी नहीं मिलने से उनकी खड़ी फसलों पर संकट मंडरा रहा है। किसानों की शिकायतों के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार गुट के जिलाध्यक्ष अतुल वांदिले ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर नहरों में पानी शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि किसानों को उनके हक का पानी नहीं मिला तो पूरे वर्धा जिले में किसानों को साथ लेकर तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
समुद्रपुर और हिंगणघाट तहसील के विभिन्न गांवों के किसान नहर से सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं होने की शिकायत लेकर अतुल वांदिले के पास पहुंच रहे हैं। किसानों ने अपनी समस्याएं बताते हुए खड़ी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। किसानों की स्थिति को देखते हुए इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता जताई गई है।
वडगांव डैम के अंतर्गत सिंदी (रेलवे), विखणी, डिग्रज, भोसा, गौळ, पळसगाव, मार्डा, कळमना और सालापूर गांवों के किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, वडगांव डैम और शेंडेस्वर डैम की जलापूर्ति से जुड़े वालधुर, सुलतानपूर, कडाजना, उमरी, सातेफळ, पिंपळगाव, कुंभी, येनोरा, रिमडोह, हिंगणघाट, बुरकोनी, चिंचोली, पारडी और मानोरा गांवों के किसान भी नहर के पानी का इंतजार कर रहे हैं।
इसी तरह शेंडेस्वर डैम के अंतर्गत दहेगाव, समुद्रपूर, हळदगाव, रेनकापूर, मेणखात, कारडा, जाम, औरंगपूर, उब्दा, गव्हा, कोल्ही, चिचघाट, शेंडेस्वर, बेला, तांबारी, कांढली, आजदा और शेडगाव गांवों के किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है।
इन सभी गांवों के किसान अपने हक के पानी के लिए प्रशासन और अतुल वांदिले से मदद की मांग कर रहे हैं। यह समस्या केवल कुछ गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की खेती और किसान परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
वर्तमान में खेतों में कपास, अरहर और चना सहित विभिन्न फसलें लगी हुई हैं। फसलों की वृद्धि और उत्पादन के महत्वपूर्ण चरण में नहर का पानी उपलब्ध नहीं होने से किसानों को अपनी मेहनत और लागत डूबने का डर सता रहा है। किसान पूरे वर्ष खेतों में मेहनत करने के साथ कर्ज लेकर खेती पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। ऐसे में जरूरत के समय सिंचाई का पानी नहीं मिलने पर उनकी पूरी मेहनत प्रभावित हो सकती है।
किसानों की चिंता केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। उनके परिवारों में बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी, स्वास्थ्य संबंधी खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें भी खेती से होने वाली आय पर निर्भर हैं। यदि खेती से आमदनी नहीं हुई तो इन जिम्मेदारियों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। इसी चिंता के बीच कई किसान अपनी समस्याएं लेकर अतुल वांदिले के पास पहुंच रहे हैं। किसानों की परेशानियां सुनने के बाद उन्होंने प्रशासन से इस मामले को सामान्य शिकायत के बजाय गंभीर संकट के रूप में देखने की मांग की है।
भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए दीर्घकालीन जल प्रबंधन की जरूरत भी जताई गई है। नदियों पर उचित स्थानों पर बांध और बंधारे बनाने, जल भंडारण की क्षमता बढ़ाने, जल संरक्षण के कार्य प्रभावी ढंग से लागू करने और बारिश के दौरान उपलब्ध पानी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। उनके अनुसार, केवल सड़कों और नालों का निर्माण विकास नहीं है, बल्कि किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराना, खेती को सहारा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी विकास का महत्वपूर्ण आधार है।
इस संबंध में अतुल वांदिले ने जिलाधिकारी से समुद्रपुर और हिंगणघाट तहसील के साथ पूरे वर्धा जिले के किसानों की पानी संबंधी समस्या पर तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने संबंधित सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाकर वडगांव डैम और शेंडेस्वर डैम की नहरों से जलापूर्ति शुरू करने के संबंध में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। साथ ही पानी वितरण की उचित व्यवस्था कर संबंधित गांवों के किसानों तक वास्तविक रूप से पानी पहुंचाने की अपील की है।
उन्होंने स्थानीय विधायकों से भी इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय किसानों के हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जब उनके निर्वाचन क्षेत्रों के किसान पानी के लिए मदद मांग रहे हैं, तब जनप्रतिनिधियों को केवल आश्वासन देने के बजाय प्रशासन के साथ समन्वय कर किसानों को न्याय दिलाने के लिए पहल करनी चाहिए। किसानों को पानी मिलना उनका बुनियादी अधिकार है और इस अधिकार के लिए सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होने की जरूरत है।
अतुल वांदिले ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग केवल समुद्रपुर और हिंगणघाट तहसील तक सीमित नहीं है। पूरे वर्धा जिले के किसानों को उनके हिस्से का पानी मिलना चाहिए और जिले के किसी भी गांव के किसान को पानी की कमी के कारण संकट का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल निर्णय लेकर नहरों में पानी की आपूर्ति शुरू की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांग पर समय रहते कार्रवाई नहीं की तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार गुट की ओर से जिलाध्यक्ष के रूप में अतुल वांदिले स्वयं किसानों को साथ लेकर पूरे वर्धा जिले में तीव्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और कार्रवाई की जरूरत है। किसानों को उनके हक का पानी दिलाने के लिए यह संघर्ष अंतिम समय तक जारी रहेगा।
अतुल वांदिले ने कहा कि किसान जीवित रहेगा तभी खेती बच पाएगी और खेती सुरक्षित रहने पर ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था कायम रह सकेगी।

