चिमूर तहसील के शंकरपुर ग्राम पंचायत से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) से जुड़े एक गंभीर और जनहित के मुद्दे ने प्रशासन का ध्यान खींचा है। ग्राम पंचायत शंकरपुर के डिप्टी सरपंच अशोक चौधरी ने इनएक्टिव जॉब कार्ड धारकों के रोजगार अधिकारों को बहाल करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष कैंप आयोजित करने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने पंचायत समिति चिमूर के ग्रुप डेवलपमेंट ऑफिसर को औपचारिक प्रतिनिधित्व सौंपा है, जिसकी एक प्रति जिला परिषद चंद्रपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी भेजी गई है।

डिप्टी सरपंच द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्व में उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में रहने वाले अनेक मजदूरों के जॉब कार्ड तकनीकी त्रुटियों या दस्तावेज़ी कमियों के कारण इनएक्टिव हो गए हैं। इसके चलते संबंधित लाभार्थी अपने वैधानिक रोजगार अधिकार से वंचित हो रहे हैं। यह स्थिति महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की मूल भावना के विपरीत है, जिसमें रोजगार का अधिकार, पंजीकरण की सुरक्षा और मजदूरी की गारंटी स्पष्ट रूप से सुनिश्चित की गई है।

प्रतिनिधित्व में यह भी रेखांकित किया गया है कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली MGNREGA की ऑपरेशनल गाइडलाइंस के अनुसार MIS वेरिफिकेशन, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और जॉब कार्ड अपडेटिंग के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर भौतिक सत्यापन आवश्यक है। इसके बिना जॉब कार्डों का पुनः सक्रिय होना संभव नहीं हो पाता, जिससे ग्रामीण मजदूरों में असंतोष बढ़ रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में डिप्टी सरपंच अशोक चौधरी ने पंचायत समिति स्तर से औपचारिक आदेश जारी कर शंकरपुर ग्राम पंचायत में “स्पेशल जॉब कार्ड रीएक्टिवेशन कैंप” आयोजित करने की मांग की है। इस कैंप में MIS असिस्टेंट, टेक्निकल असिस्टेंट, विलेज एम्प्लॉयमेंट ऑफिसर सहित संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में इनएक्टिव जॉब कार्ड धारकों का पंजीकरण, दस्तावेज़ सत्यापन, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और MIS पर त्वरित अपडेट की प्रक्रिया पूरी किए जाने की आवश्यकता बताई गई है।

डिप्टी सरपंच का कहना है कि इस तरह के विशेष कैंप से न केवल लाभार्थियों के कानूनी रोजगार अधिकार सुरक्षित होंगे, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर बढ़ते असंतोष को भी कम किया जा सकेगा। उन्होंने प्रशासन से इस मांग पर शीघ्र और सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक पात्र मजदूरों तक पहुंच सके और MGNREGA कानून की मंशा को जमीन पर प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

Pratahkal Newsroom

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