वट पूर्णिमा: कोरपना के पारडी गांव में महिलाओं ने की पूजा-अर्चना
महाराष्ट्र के कोरपना तहसील में विवाहित महिलाओं ने वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा कर अपने पतियों के उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना की।

कोरपना के पारडी गांव में पारंपरिक वेशभूषा में खड़ी विवाहित महिलाएं वट पूर्णिमा के अवसर पर पूजा सामग्री लिए हुए।
कोरपना, 29 जून: कोरपना तहसील के पारडी गांव में वट पूर्णिमा (वट सावित्री) का पर्व पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर विवाहित महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और वृक्ष की परिक्रमा करते हुए अपने पतियों की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य एवं अखंड सौभाग्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
वट पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर वट वृक्ष के समीप महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। महिलाओं ने पूजा सामग्री, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित कर इस पावन व्रत का निष्ठापूर्वक पालन किया। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दौरान सावित्री-सत्यवान की कथा का विशेष स्मरण किया गया, जो इस पर्व की मूल प्रेरणा है। महिलाओं ने केवल अपने परिवार की सुख-समृद्धी ही नहीं, बल्कि समाज में शांति और सभी के उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी मंगल कामना की।
महाराष्ट्र में ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाया जाने वाला वट पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव का स्थान रखता है। वट वृक्ष को दीर्घायु, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, इसीलिए इस विशेष तिथि पर वट पूजन की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

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