महाराष्ट्र के लातूर जिले के उदगीर में मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक भयावह घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। ३६ वर्षीय तस्लिम शफी कुरेशी नामक विवाहिता की उसके ही ससुराल में जिंदा जलाकर हत्या करने का आरोप पति, सास और ससुर पर लगा है। मृतका के पिता के अनुसार, २०१९ में तस्लिम का निकाह हुआ था। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहने के बाद, जल्द ही उनके जीवन में प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया। पति उन पर चरित्र को लेकर शक करता था, मामूली बातों पर मारपीट की जाती थी और मायके से दो लाख रुपये लाने के लिए लगातार मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।

घटना के दिन तस्लिम ने अपने पिता को फोन कर घबराए हुए लहजे में मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा था, "बाबा, जल्दी आइए, वह मुझे मार रहा है।" इसके कुछ समय बाद ही फिर से फोन आया, जिसमें उनकी रोंगटे खड़े कर देने वाली आखिरी आवाज सुनाई दी, "बाबा, मुझे बचा लो... वे मुझे जला रहे हैं।" इसके बाद फोन अचानक कट गया। बेटी की आवाज सुनकर परिजन तुरंत ससुराल पहुंचे, जहां तस्लिम गंभीर रूप से झुलसी हुई अवस्था में मिलीं। उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन अंततः उनकी मौत हो गई।

यह आखिरी फोन कॉल इस हत्याकांड का सबसे अहम सबूत साबित हो रहा है। इस दर्दनाक घटना के बाद तस्लिम के पिता की शिकायत पर उदगीर ग्रामीण पुलिस थाने में पति, सास और ससुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा ८५ (क्रूरता), १०३(१) (हत्या) और ३(५) के तहत गंभीर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और तकनीकी व परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर गहन जांच की जा रही है। तस्लिम का वह आखिरी आक्रोश अब केवल एक बेटी की पुकार नहीं, बल्कि कौटुंबिक अत्याचार के खिलाफ समाज को झकझोरने वाला संदेश बन गया है।

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