उदगीर में सड़क के लिए तरस रहे 15 हजार लोग, रेल पटरी पार कर पहुंचाते हैं शव
उदगीर के हनुमाननगर-संतोषी मातानगर में सड़क के अभाव से हजारों लोग परेशान हैं, शव और मरीजों को रेलवे पटरी पार करनी पड़ती है।

तस्वीर में ग्रामीण उदगीर के हनुमाननगर क्षेत्र में रेलवे पटरी पार करते हुए नजर आ रहे हैं।
उदगीर शहर के हनुमाननगर और संतोषी मातानगर क्षेत्र के करीब 10 से 15 हजार नागरिक सड़क के अभाव में गंभीर परेशानी झेल रहे हैं। दैनिक आवागमन से लेकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और यहां तक कि अंतिम संस्कार के लिए शव को श्मशानभूमि ले जाने तक नागरिकों को रेलवे पटरी पार करने जैसे खतरनाक रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन की अनदेखी के कारण यह समस्या अब केवल सड़क की सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि नागरिकों की जान की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गई है।
इस क्षेत्र से श्मशानभूमि जाने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित सड़क उपलब्ध नहीं होने के कारण नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। किसी परिवार में व्यक्ति की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते समय भी रेलवे पटरी पार करनी पड़ती है। अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले वाहनों को रेलवे मार्ग के दूसरी ओर रोकना पड़ता है और इसके बाद शव को कंधे पर उठाकर पटरी पार करनी पड़ती है। नागरिकों का कहना है कि मृत व्यक्ति को भी सम्मानजनक अंतिम यात्रा न मिल पाना बेहद पीड़ादायक स्थिति है।
क्षेत्र में एंबुलेंस के सीधे प्रवेश की सुविधा नहीं होने से बीमार, बुजुर्ग और गंभीर मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। आपात स्थिति में मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण काफी समय रास्ते में ही बीत जाता है। नागरिकों के अनुसार, जिस स्थान तक महज पांच मिनट में पहुंचा जा सकता है, वहां जाने के लिए लगभग एक घंटे का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे गंभीर मरीजों के उपचार में देरी होने की आशंका बनी रहती है।
सड़क के अभाव में नागरिकों का दिन-रात रेलवे पटरी से होकर आना-जाना जारी है। छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज भी मजबूरी में इस खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। रेलवे यातायात जारी रहने के दौरान पटरी पार करना बेहद जोखिमपूर्ण है। नागरिकों ने सवाल उठाया है कि किसी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा क्या?
हनुमाननगर और संतोषी मातानगर क्षेत्र के नागरिकों को सुरक्षित और सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के लिए रेलवे मार्ग के नीचे तत्काल भुयारी मार्ग बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि यह समस्या केवल आवागमन से जुड़ी नहीं है, बल्कि हजारों लोगों के दैनिक जीवन और सुरक्षा से संबंधित है।
रेलवे प्रशासन और स्थानीय प्रशासन को संयुक्त रूप से क्षेत्र का निरीक्षण कर इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए, ऐसी अपेक्षा नागरिकों ने व्यक्त की है।
क्षेत्र के नागरिकों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है। उनका कहना है, “मृतदेहाला खांदा देतानाही रेल्वे पटरी ओलांडावी लागते, रुग्णाला दवाखान्यात नेतानाही जीव धोक्यात ghalava लागतो. पाच मिनिटांच्या अंतरासाठी तासभर वळसा घ्यावा लागतो. प्रशासनाने आमच्या समस्येकडे आणखी किती दिवस दुर्लक्ष करायचे?”
हजारों नागरिकों की सुरक्षा के इस गंभीर प्रश्न को देखते हुए प्रशासन से कागजी आश्वासनों के बजाय प्रत्यक्ष उपाययोजना करने और भुयारी मार्ग के साथ स्थायी सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग जोर पकड़ रही है।

Limbraj Panhalkar (Latur)
नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर
वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)
कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)
बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग
अनुभव: 20 साल
परिचय
लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
