महाराष्ट्र की शहरी बस्तियों में वर्षों से कानूनी असमंजस और अनिश्चितता में जीवन जी रहे लाखों नागरिकों के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी महत्व का निर्णय लिया है। गुंठेवारी और छोटे भूखंडों पर बसे परिवारों को बड़ी राहत देते हुए ‘महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025’ को आज विधानसभा में मंजूरी दे दी गई। यह विधेयक राज्य की शहरी जमीन व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

विधानसभा में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक का उद्देश्य उन जटिल और जाचक प्रावधानों को शिथिल करना है, जिनके कारण शहरी क्षेत्रों में 5 से 10 गुंठे या उससे भी छोटे भूखंडों पर बसे नागरिकों को अब तक अपने ही घर की वैधानिक मान्यता के लिए संघर्ष करना पड़ता था। अनुमान है कि इस फैसले से लगभग 60 लाख परिवारों, यानी करीब तीन करोड़ नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

अब तक छोटे भूखंडों पर बने मकानों के मालिकों को न तो स्वतंत्र रूप से सातबारा उतारे में नाम दर्ज कराने की सुविधा थी और न ही जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया सहज थी। इसके अलावा, अकृषिक यानी नॉन-एग्रीकल्चरल उपयोग के लिए बार-बार जिलाधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य था, जिससे प्रक्रिया लंबी, खर्चीली और जटिल हो जाती थी। नए संशोधन के तहत, जिन क्षेत्रों में विकास योजना या क्षेत्रीय योजना पहले से स्वीकृत है, वहां अलग से ‘एनए’ अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके स्थान पर एकमुश्त अधिमूल्य का भुगतान कर प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

इस विधेयक के लागू होने से शहरी और बिगरशेती क्षेत्रों में छोटे तुकड़ों की खरीद-बिक्री को वैधानिक संरक्षण मिलेगा और संबंधित भूखंड मालिकों का नाम स्वतंत्र रूप से राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो सकेगा। यह बदलाव खास तौर पर उन नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्षों से अपने घर में रहते हुए भी कानूनी स्वामित्व के अभाव में असुरक्षा महसूस कर रहे थे।

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह संशोधन सरसकट ग्रामीण कृषि क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा। हालांकि, यदि किसी ग्रामीण क्षेत्र को आधिकारिक रूप से रहिवासी घोषित किया जाता है, तो वहां भी इस कानून के प्रावधान लागू हो सकेंगे। कृषि योग्य जमीनों के मामले में तुकड़ेबंदी से जुड़े मूल नियम यथावत रहेंगे, ताकि खेती की निरंतरता और संरचना प्रभावित न हो।

इसके साथ ही, एक और महत्वपूर्ण निर्णय के तहत 15 नवंबर 1965 से 15 अक्टूबर 2024 के बीच शहरी और बिगरशेती क्षेत्रों में हुए छोटे भूखंडों के लेन-देन को बिना किसी शुल्क के नियमित करने का प्रावधान किया गया है। इससे दशकों पुराने विवादों और कानूनी अड़चनों का समाधान होने की उम्मीद है। वहीं, किसानों को सीमित जरूरतों जैसे खेत तक रास्ता, कुआं या घरकुल निर्माण के लिए 1 से 5 गुंठे जमीन खरीदने की अनुमति दी गई है, हालांकि इसके लिए जिलाधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होगी।

‘महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025’ के माध्यम से राज्य सरकार ने एक संतुलित रास्ता अपनाने का प्रयास किया है, जिसमें ग्रामीण कृषि हितों की रक्षा करते हुए शहरी गुंठेवारी की जटिल समस्या का समाधान किया गया है। यह फैसला न केवल लाखों परिवारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि शहरी भूमि बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता भी लाएगा। आने वाले समय में यह संशोधन महाराष्ट्र की शहरी विकास प्रक्रिया में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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