कांदा नीति पर सरकार का ढुलमुल रवैया, किसानों के हितों को नुकसान—राजू शेट्टी शहादा के किसान मेळावे में केंद्र–राज्य सरकार पर गंभीर आरोप
शहादा में किसान मेळावे के दौरान राजू शेट्टी ने केंद्र और राज्य सरकार पर कांदा आयात–निर्यात नीति में धरसोडी का आरोप लगाते हुए कहा कि अस्थिर निर्णयों से भारत ने बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पारंपरिक बाजार खो दिए। उन्होंने आपदा राहत प्रस्ताव न भेजने, गलत पंचनामा और किसानों की कर्ज समस्याओं पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

शहादा में आयोजित किसान मेळावे के दौरान स्वाभिमान शेतकरी संगठन के नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने केंद्र व राज्य सरकार की कांदा आयात–निर्यात नीति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार की अस्थिर और धरसोडी की नीति के कारण भारत ने अपनी पारंपरिक और मजबूत बाजारों—श्रीलंका और बांग्लादेश—को खो दिया था। कांदा निर्यात पर कभी शुल्क बढ़ाना, कभी प्रतिबंध लगाना और कभी अचानक ढील देना, इस अनिश्चितता से पड़ोसी देशों ने भारतीय बाजार से दूरी बना ली।
राजू शेट्टी ने कहा कि बांग्लादेश को जब बड़ी मात्रा में प्याज की आवश्यकता थी, तब उन्होंने भारतीय बाजार के बजाय ईरान से आयात का निर्णय लिया। अब बांग्लादेश ने फिर से भारतीय कांदे की खरीद शुरू करने की अनुमति दी है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि कीमतें बढ़ने पर निर्यात शुल्क बढ़ाने या बंदी लगाने जैसी नीतिगत चूक दोबारा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे किसानों को भारी नुकसान होता है।
कार्यक्रम में उन्होंने एक और गंभीर दावा किया कि राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद राज्य सरकार ने किसानों की फसल हानि के लिए केंद्र को प्रस्ताव ही भेजा नहीं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस बात की पुष्टि की है। शेट्टी ने कहा कि नुकसान का सही पंचनामा करना स्थानीय नेताओं की जिम्मेदारी होती है, लेकिन उन्होंने यह कर्तव्य निभाया ही नहीं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जिस कीचड़ में किसानों की फसल बह गई, उसी कीचड़ में ऐसे नेताओं को फेंक देना चाहिए।
अपने संबोधन में शेट्टी ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी निशाना साधा और दावा किया कि उन्होंने डेढ़ सौ करोड़ रुपये कर्ज वाले चीनी कारखाने को मात्र 27 करोड़ रुपये में खरीद लिया, जबकि बैंकों की बदहाल स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया। शेट्टी ने सरकार से मांग की कि अपने वायदे के अनुसार किसानों का सातबारा कोरा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कर्जमाफी पर स्थगन के बावजूद बैंक किसानों को परेशान कर रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।
मेळावे में अनिल पवार, घनश्याम चौधरी, किशोर ढगे, बापूसाहेब करंडे, संदेश देशमुख, अमर कदम, नथ्थू पाटील, वसंत पाटील, पवन पाटील, योगेश पाटील और रत्नदीप पाटील सहित कई किसान नेता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन में किसानों ने सरकार से स्पष्ट, स्थिर और किसानहितैषी नीति बनाने की मांग दोहराई।
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