महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को ठाणे में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक-मालिकों के लिए ‘धर्मवीर आनंद दिघे साहेब पैसेंजर ट्रांसपोर्ट ड्राइवर-ओनर वेलफेयर बोर्ड’ की शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने राज्यभर के परिवहन श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई योजनाओं की घोषणा की। शिंदे ने कहा कि यह पहल रोजाना की कमाई पर निर्भर परिवहन कर्मियों के योगदान को सम्मान देने और उन्हें बेहतर आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

शिंदे ने 65 वर्ष की आयु पूरी कर चुके चालक-मालिकों के लिए ‘रिटायरमेंट ऑनर स्कीम’ की घोषणा की। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को 10,000 रुपये का सम्मान राशि दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिन करीब 735 पात्र लोगों ने अपने बैंक विवरण जमा किए थे, उनके बैंक खातों में राशि पहले ही जमा की जा चुकी है। बाकी पात्र लाभार्थियों को भी चरणबद्ध तरीके से यह राशि दी जाएगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के विपरीत ऑटो और टैक्सी चालक-मालिकों के लिए आमतौर पर कोई निश्चित सेवानिवृत्ति आयु या सेवानिवृत्ति के बाद सुनिश्चित आर्थिक सहायता नहीं होती। नई योजना का उद्देश्य वर्षों तक काम करने वाले इन चालक-मालिकों के योगदान को सम्मान देना है।

वेलफेयर बोर्ड के तहत ड्यूटी के दौरान चालकों के लिए जीवन और दिव्यांगता बीमा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य सहायता और काम के दौरान चोट लगने पर आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है।

चालक-मालिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति की भी घोषणा की गई है। कक्षा 10 में कम से कम 75 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को 5,000 रुपये, जबकि कक्षा 12 में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 7,000 रुपये दिए जाएंगे। डिग्री स्तर की शिक्षा के लिए भी शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। शिंदे ने कहा कि इन उपायों के जरिए चालकों और उनके परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ी जरूरतों को कवर किया जाएगा।

इस दौरान शिंदे ने कोविड-19 महामारी के दौरान ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि कई परिवहन कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने ठाणे में ‘पिंक रिक्शा’ पहल के तहत महिला चालकों के योगदान का भी उल्लेख किया।

शिंदे ने कहा कि परिवहन कर्मचारी अक्सर दुर्घटना पीड़ितों, बुजुर्ग यात्रियों, महिलाओं और बच्चों की मदद करते हैं। उनके मुताबिक, समाज में इन कर्मियों के योगदान को उचित मान्यता मिलनी चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान शुरू की गई योजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ और ‘शासन आपल्या दारी’ पहल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ‘शासन आपल्या दारी’ के जरिए करीब पांच करोड़ लोगों को लाभ मिला।

शिंदे ने ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच मराठी भाषा सीखने के लिए फिर से अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि इससे पहले महाराष्ट्रभर में 180 केंद्रों के जरिए करीब 1.65 लाख लोगों ने मराठी भाषा सीखी थी।

शिंदे ने कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और 10,000 रुपये का सेवानिवृत्ति सम्मान राशि इसका एक उदाहरण है। नए कल्याण बोर्ड के जरिए ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक-मालिकों को सेवानिवृत्ति, बीमा, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सहायता देने की पहल उनके सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा दायरे को व्यापक करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Pratahkal Newsroom

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