शंकरपुर में दहशत का साया: बाघ–तेंदुए के हमलों में गोरी की मौत, पांच दिनों में लगातार घटनाओं से गांवों में भय
चिमूर तालुका के शंकरपुर इलाके में बाघ और तेंदुए के लगातार हमलों से दहशत का माहौल है। खैरी गांव में बीती रात एक गोरी की मौत हो गई, जबकि कुछ दिन पहले एक व्यक्ति की जान जा चुकी है। लगातार घटनाओं से किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं और ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

चिमूर तालुका के शंकरपुर क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों ने ग्रामीण जीवन को हिला कर रख दिया है। बीते कुछ दिनों से एक के बाद एक हो रही घटनाओं ने खेतों से लेकर गांव की गलियों तक डर का माहौल पैदा कर दिया है। ताजा घटना शंकरपुर से लगभग चार किलोमीटर दूर खैरी गांव की है, जहां बीती रात एक जंगली जानवर के हमले में किसान सुरेश भीवरकर की गोरी की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और असुरक्षा का माहौल और गहरा हो गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात के समय जंगली जानवर गांव की सीमा में घुस आया और गोरी पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सुबह होते ही ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और मृत गोरी को गड्ढा खोदकर दफना दिया। प्रारंभिक जांच में विभाग ने आशंका जताई है कि यह हमला धारीदार बाघ का नहीं, बल्कि तेंदुए का हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले इसी किसान की एक गाय पर भी तेंदुए ने हमला कर उसे मार डाला था, जिससे इस आशंका को बल मिलता है।
यह घटना उस समय सामने आई है जब अभी कुछ ही दिन पहले शंकरपुर–कवडशी कंट्री रोड पर एक धारीदार बाघ ने शेषराव जाड़े नामक व्यक्ति पर हमला कर उसकी जान ले ली थी। इस घटना की स्मृति ताजा ही थी कि उससे मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर खैरी गांव में पालतू जानवर पर हमला हो गया। बीते चार से पांच दिनों में खेतों और गांवों के आसपास तेंदुओं के घुसने और पालतू पशुओं को मारने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे किसानों और खेत मजदूरों में भारी भय व्याप्त है।
लगातार हो रहे इन हमलों के कारण ग्रामीण खेतों में जाने से कतरा रहे हैं, जबकि रात के समय गांवों में भी लोग जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। भिसी क्षेत्र में पहले ही इंसानों की जान लेने वाले दो बाघों को वन विभाग ने पकड़कर बंद कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद हमलों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही। इसी कारण स्थानीय नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वन्यजीवों पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए और भविष्य में कोई और बड़ी घटना हुई, तो हालात गंभीर टकराव की ओर बढ़ सकते हैं। शंकरपुर और आसपास के गांव आज भय और अनिश्चितता के साये में जी रहे हैं, जहां हर रात एक नई अनहोनी की आशंका लोगों की नींद उड़ा रही है।
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