शिरपुर तालुका की जिला परिषद स्कूलों में शिक्षकों को अध्यापन के अलावा लगातार विभिन्न अशैक्षणिक शासकीय कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होने की चिंता अभिभावकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने व्यक्त की है। शिक्षकों का बड़ा समय चुनाव प्रक्रिया, जनगणना, मतदाता सूची सत्यापन, विभिन्न शासकीय सर्वेक्षणों तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यतीत होने के कारण अध्यापन के लिए उपलब्ध समय लगातार कम होता जा रहा है।

शिक्षकों का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, लेकिन उन पर लगातार अशैक्षणिक जिम्मेदारियों का बोझ डाले जाने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस संबंध में अनेक अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा प्रेमियों ने चिंता जताई है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की स्कूलों में यह स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है।

शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक को रीढ़ माना जाता है। ऐसे में शिक्षकों को कार्यालयीन और अन्य शासकीय कार्यों में व्यस्त रखने के बजाय उन्हें कक्षाओं में विद्यार्थियों के बीच अध्यापन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता बताया जा रहा है। विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को अशैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग अब तेज होती जा रही है।

जिला परिषद स्कूल, त-हाडी की स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष किरण अहिरे ने कहा, “यदि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है तो शिक्षकों को उनके मूल अध्यापन कार्य के लिए पर्याप्त समय मिलना आवश्यक है। अशैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ कम कर ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे शिक्षक केवल अध्यापन पर ध्यान केंद्रित कर सकें।”

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story