लातूर में बुधवार का दिन शिक्षकों के प्रचंड आक्रोश का साक्षी बना, जब टीईटी परीक्षा को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के विरोध में जिलेभर के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। अपनी अनेक लंबित मांगों के समाधान की मांग करते हुए उन्होंने सभी शालाएँ बंद रखीं और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पार्क से पुराने जिलाधिकारी कार्यालय तक विशाल महामोर्चा निकाला, जिसने पूरे शहर को थर्रा दिया।

सुबह से ही हजारों शिक्षकों की भीड़ आंबेडकर पार्क में उमड़ने लगी। सभी की टोपियों और हाथों में उठे फलक पर उनकी मांगें दर्ज थीं, जबकि गूंजती नारों ने शहर के वातावरण को आंदोलक रंग में रंग दिया। मोर्चे का जनसमुद्र इतना बड़ा था कि उसका एक सिरा छत्रपति शिवाजी महाराज चौक तक फैला था, जबकि दूसरा सिरा टाउन हॉल के पास तक पहुंच गया था।

शिक्षक संघटनाओं ने आरोप लगाया कि टीईटी परीक्षा को रद्द करने और अन्य लंबित मुद्दों के समाधान को लेकर सरकार से कई बार पत्राचार और चर्चा की गई, लेकिन उनकी आवाज़ को लगातार अनसुना किया जा रहा है। इसी नाराज़गी ने आज आंदोलन का रूप लिया, जिसके तहत राज्यभर की लगभग 80 हजार शालाएँ बंद रखी गईं। लातूर जिले के सभी शिक्षकों ने भी अपनी 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराते हुए आंदोलन की एकजुटता का परिचय दिया।





सरकार की ओर से मोर्चे में भाग लेने पर वेतन कटौती की चेतावनी देने के बावजूद शिक्षक पीछे नहीं हटे। पुराने जिलाधिकारी कार्यालय परिसरों में शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो राज्यभर में और भी तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

इस भव्य मोर्चे का आयोजन जिला परिषद शिक्षक संघटना समन्वय समिति की ओर से किया गया था, जो अब सरकार के निर्णय की प्रतीक्षा में है। शिक्षकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल उनकी नौकरी या परीक्षाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।

Pratahkal Newsroom

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