‘बाळूमामांच्या नावानं चांगभलं’ के ‘तात्या’ अब मंच पर, ‘तात्याची पैठणी’ की धूम
‘बाळूमामांच्या नावानं चांगभलं’ के तात्या अब ‘तात्याची पैठणी’ से मंच पर छाए हैं। महाराष्ट्र-कर्नाटक में महिलाओं को मिल रहा भरपूर प्रतिसाद।

तस्वीर में मराठी धारावाहिक के लोकप्रिय कलाकार 'तात्या' और उनके साथ एक महिला नजर आ रही हैं।
श्रीक्षेत्र पैठण के भूमिपुत्र और लोकप्रिय मराठी धारावाहिक ‘बाळूमामांच्या नावानं चांगभलं’ में ‘तात्या’ का विनोदी किरदार निभाने वाले कलाकार ने अपने अभिनय से घर-घर में अलग पहचान बनाई है। धारावाहिक में तात्या की खास संवाद अदायगी, पान चबाने की शैली, मजाकिया स्वभाव और प्रसंगों को अलग अंदाज में प्रस्तुत करने की शैली दर्शकों को पसंद आई है।
अब यही लोकप्रिय ‘तात्या’ ‘तात्याची पैठणी’ नामक मनोरंजनात्मक कार्यक्रम के माध्यम से महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमावर्ती क्षेत्र की महिलाओं से सीधे रूबरू हो रहे हैं। गणेशोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘तात्याची पैठणी’ कार्यक्रम को महिलाओं का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिल रहा है। पैठणी जीतने की उत्सुकता, विभिन्न मनोरंजक खेल, हास्य-विनोद, तात्या की खास शैली और दर्शकों के साथ सीधा संवाद कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बना रहे हैं।
विशेष रूप से यह कार्यक्रम केवल पैठणी जीतने की प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के साथ पूरे परिवार के लिए मनोरंजन का माध्यम बन रहा है। गणेशोत्सव के पहले ही पर्व में विभिन्न गणेश मंडलों और महिला मंडलों ने कार्यक्रम की तारीखें पहले से तय कर ली थीं, जिसके चलते कई कार्यक्रम हाउसफुल रहे।
पुणे, सोलापुर से कोल्हापुर-कर्नाटक सीमावर्ती क्षेत्र तक ‘तात्याची पैठणी’ की मैफल सजी। पुणे क्षेत्र के वाघोली, डी.एस.के. विश्व (धायरी), भोसरी, सोलापुर जिले के सांगोला स्थित लोहार गली और मस्के कॉलोनी, साथ ही कोल्हापुर क्षेत्र के कोल्हापुर शहर, किणे, शिरदवाड और आदमापुर में ‘तात्याची पैठणी’ के कार्यक्रम उत्साह के साथ आयोजित हुए। कर्नाटक सीमावर्ती क्षेत्र के बोरगांव और आनूर में भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम का आनंद लिया। आप्पाची वाडी, आदमापुर और आसपास के क्षेत्र में भी इस कार्यक्रम की चर्चा है।
मराठी धारावाहिक में अपने खास अभिनय से लोकप्रिय हुए ‘तात्या’ को प्रत्यक्ष मंच पर देखने का अवसर मिलने से कार्यक्रम का आकर्षण बढ़ा है। धारावाहिक के किरदार की विनोदी शैली को कायम रखते हुए कलाकार दर्शकों के साथ सीधा संवाद करते हैं। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और हास्य के फव्वारों के साथ तालियों की गड़गड़ाहट कार्यक्रम की खासियत बन रही है।
पैठणी जीतने का आनंद और तात्या के हास्य-विनोद की मेजवानी, ऐसा दोहरा अनुभव महिलाओं को मिल रहा है। इसी के चलते विभिन्न क्षेत्रों से ‘तात्याची पैठणी’ की मांग बढ़ रही है।
गणेशोत्सव में मिले प्रतिसाद के बाद अब नवरात्रोत्सव, कोजागरी पूर्णिमा और दिवाली के साथ महिला मेले, स्नेह सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विभिन्न उत्सव और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए ‘तात्याची पैठणी’ की बुकिंग शुरू की गई है।
महिला मंडल, गणेश मंडल, सामाजिक संस्थाएं तथा विभिन्न कार्यक्रम आयोजक अपने कार्यक्रम में ‘तात्याची पैठणी’ के मनोरंजन का रंग शामिल कर सकते हैं। आगामी त्योहारों और उत्सवों के दौरान इस कार्यक्रम की रंगत और बढ़ने की संभावना है।
‘तात्याची पैठणी’ कार्यक्रम में महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया और लोकप्रिय ‘तात्या’ की विनोदी शैली को उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ दाद दी। नवरात्रोत्सव, कोजागरी पूर्णिमा, दिवाली, महिला मेले, स्नेह सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कार्यक्रम की बुकिंग शुरू होने के साथ धारावाहिक के लोकप्रिय ‘तात्या’ का मंचीय अंदाज अब विभिन्न आयोजनों में मनोरंजन का हिस्सा बन रहा है। गणेशोत्सव में मिले भरपूर प्रतिसाद के बाद आगामी कार्यक्रमों के लिए तारीखें तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
