कपाशी पर मौसम की मार, पात्या-फूलों की गळती से बढ़ी किसानों की चिंता
त-हाडी में बारिश थमने से कपाशी, तूर और सोयाबीन प्रभावित हैं। तेज धूप के बीच कपाशी की पात्या-फूलों की गळती ने किसानों की चिंता बढ़ाई।

तस्वीर में त-हाडी क्षेत्र में सूखे और गर्मी के कारण खेत की सूखी मिट्टी पर गिरे कपाशी के फूल और पात्या दिखाई दे रहे हैं।
त-हाडी में बारिश ने एक दिन दमदार दस्तक देने के बाद फिर दूरी बना ली है। पिछले कुछ दिनों से सुबह से तेज धूप और दोपहर के बाद आसमान में बादलों की आवाजाही का सिलसिला बना हुआ है। बादल छाने और गरजने के बावजूद बारिश नहीं होने से खेतों में नमी लगातार कम हो रही है। गर्मी जैसे हालात के बीच बदलते मौसम का सीधा असर कपाशी की फसल पर दिखाई देने लगा है। कपाशी की बढ़वार रुकने के साथ पात्या और फूलों की गळती शुरू हो गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
इस बार खरीफ सीजन की शुरुआत में बारिश ने साथ दिया था। पर्याप्त बारिश के कारण कपाशी की फसल अच्छी तरह बढ़ रही थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश के थम जाने के बाद खेतों की स्थिति बदल गई है। दिनभर तेज धूप और गर्म वातावरण के बीच बीच-बीच में आसमान में काले बादल छा रहे हैं। बादलों को देखकर किसानों को बारिश की उम्मीद बंधती है, लेकिन बारिश नहीं होने से उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
फिलहाल कपाशी की फसल को बढ़वार के लिए पर्याप्त नमी की जरूरत है, लेकिन जमीन में मौजूद नमी लगातार कम होती जा रही है। इसका असर कपाशी के पौधों की बढ़वार पर पड़ रहा है। नई पात्या और फूलों की संख्या कम होने के साथ तैयार पात्या और फूल भी गिरने लगे हैं। कुछ क्षेत्रों में पानी के तनाव के कारण कपाशी के पौधों के मुरझाने की स्थिति भी दिखाई दे रही है।
कपाशी के उत्पादन के लिए इस अवधि में बारिश को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में बारिश के अचानक रुक जाने से किसानों के सामने फसल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। बारिश में और देरी होने पर कपाशी के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। पहले से ही बढ़ी हुई खेती की लागत, महंगी खाद, कीटनाशक और मजदूरी के खर्च के बीच बारिश की अनिश्चितता ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
बारिश की कमी का असर तूर और सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों पर भी पड़ रहा है। सुबह से तेज धूप और दोपहर के बाद आसमान में बादलों की स्थिति पिछले कुछ दिनों से बनी हुई है। बादलों की गरज सुनाई देती है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की निगाहें लगातार आसमान पर टिकी हैं।
किसानों को उम्मीद है कि समय पर बारिश होने से कपाशी की फसल को फिर से उभारी मिल सकती है। फिलहाल त-हाडी क्षेत्र के किसान दमदार बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

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