लातूर:

लातूर शहर की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। महानगरपालिका चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार चुनावी रण किसी गठबंधन के सहारे नहीं, बल्कि पूरी तरह ‘स्वबळा’ यानी अपने दम पर लड़ा जाएगा। 23 दिसंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों में चुनाव-पूर्व गठबंधन या आघाड़ी को लेकर फिलहाल कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही। इसके बजाय, सभी दल अपनी-अपनी ताकत पर जनता के बीच उतरने की तैयारी में जुट गए हैं।

लातूर महानगरपालिका में कुल 3 लाख 21 हजार 354 मतदाता हैं। यहां 18 प्रभागों से 70 नगरसेवकों का चुनाव होना है। प्रभाग क्रमांक 1 से 16 तक चार-चार, जबकि प्रभाग 17 और 18 से तीन-तीन नगरसेवक चुने जाएंगे। प्रत्येक तीन प्रभागों के लिए उपजिल्हाधिकारी स्तर के स्वतंत्र चुनाव निर्णय अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, उम्मीदवार 30 दिसंबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 31 दिसंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 2 जनवरी 2026 तक नाम वापस लेने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। मतदान 15 जनवरी 2026 को होगा। शहर के छह अलग-अलग केंद्रों पर नामांकन स्वीकार किए जा रहे हैं। हालांकि पहले दिन दोपहर तक आधिकारिक रूप से नामांकन दाखिल होने की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन कई इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा फॉर्म ले जाने की जानकारी सामने आई है।

राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर 2017 के चुनाव की यादें ताजा हो गई हैं। उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 36 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस को 31 और तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस को मात्र एक सीट मिली थी। इस बार भी मुकाबला उतना ही कांटे का होने की संभावना जताई जा रही है।

इस चुनाव को खास बनाने वाली सबसे बड़ी वजह नेतृत्व की सीधी भिड़ंत है। भाजपा ने विधानसभा सदस्य संभाजीराव पाटील निलंगेकर को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, वहीं कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और विधायक अमित देशमुख के नेतृत्व में मैदान में उतरने का ऐलान किया है। ऐसे में यह चुनाव निलंगेकर बनाम देशमुख की प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

भाजपा सभी प्रभागों में उम्मीदवार उतारने के दावे के साथ पूरी ताकत झोंक चुकी है। संभावित उम्मीदवारों ने पदयात्राएं शुरू कर दी हैं। कांग्रेस को कुछ प्रभागों में संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन पार्टी नेतृत्व इसे सुलझाने में जुटा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) भी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी में है और संगठन को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) और शिवसेना के दोनों गुट भी अलग-अलग मैदान में उतरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। फिलहाल किसी भी स्तर पर गठबंधन की ठोस चर्चा नहीं है।

इस चुनाव में एक नया नियम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हर उम्मीदवार को 100 से 500 शब्दों का निबंध लिखना अनिवार्य किया गया है, जिसमें भ्रष्टाचार से दूर रहने की प्रतिबद्धता और चुनाव जीतने के बाद किए जाने वाले विकास कार्यों का विवरण देना होगा। यह निबंध नामांकन पत्र के अंतिम पृष्ठ पर लिखा जाएगा। इस नियम ने न केवल उम्मीदवारों बल्कि राजनीतिक हलकों में भी नई बहस को जन्म दे दिया है।

कुल मिलाकर, लातूर महानगरपालिका चुनाव केवल स्थानीय सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि नेतृत्व, संगठन और जनता के विश्वास की निर्णायक परीक्षा बनने जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में जिले की राजनीति पर दूरगामी रूप से दिखाई देगा।

Pratahkal Newsroom

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