सोनाली के ऐतिहासिक पाझर तालाब के संरक्षण के लिए ग्रामीणों की मंत्रालय में पहल, मंत्रियों से हुई सकारात्मक चर्चा
कोल्हापुर के सोनाली गांव के ऐतिहासिक पाझर तालाब के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास की मांग लेकर ग्रामीण मंत्रालय पहुंचे। मंत्रियों के साथ हुई महत्वपूर्ण चर्चा के बाद विकास को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।

मुंबई स्थित मंत्रालय में कोल्हापुर के पालकमंत्री प्रकाशराव आबिटकर और मंत्री हसन मुश्रीफ को सोनाली गांव के ऐतिहासिक पाझर तालाब के पर्यटन विकास व सौंदर्यीकरण के लिए ज्ञापन सौंपते ग्रामीण प्रतिनिधि।
कागल तहसील के सोनाली गांव स्थित ऐतिहासिक पाझर तालाब के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास को लेकर ग्रामीणों ने अब अपनी मांग को सीधे मंत्रालय तक पहुंचाया है। गांव की जीवनरेखा माने जाने वाले इस महत्वपूर्ण जलस्रोत के विकास के लिए ग्रामीणों ने महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री एवं कोल्हापुर जिले के पालकमंत्री प्रकाशराव आबिटकर तथा मंत्री हसन मुश्रीफ से मुंबई स्थित मंत्रालय में मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में बताया गया कि सोनाली गांव के निकट लगभग 78 एकड़ क्षेत्र में फैला यह ऐतिहासिक पाझर तालाब न केवल गांव की पेयजल व्यवस्था का प्रमुख आधार है, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटन विकास की भी अपार संभावनाएं समेटे हुए है। हालांकि, लंबे समय से आवश्यक रखरखाव और मरम्मत कार्यों के अभाव में तालाब की स्थिति प्रभावित हुई है, जिससे इसके संरक्षण और पुनर्विकास की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।
ज्ञापन में तालाब के सौंदर्यीकरण, संरचनात्मक मजबूतीकरण तथा पर्यटन केंद्र के रूप में विकास के लिए विशेष निधि उपलब्ध कराने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाते हैं तो स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति प्राप्त होगी।
मंत्री प्रकाशराव आबिटकर और मंत्री हसन मुश्रीफ ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के माध्यम से सकारात्मक पहल करने तथा आवश्यक निधि उपलब्ध कराने के लिए उचित स्तर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस दौरान ग्राम पंचायत सदस्य समाधान म्हातुगडे, विनायक म्हातुगडे, शिवाजी बचाटे और डॉ. उत्तम पोकलेकर सहित अन्य ग्रामीण प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
ग्राम पंचायत सदस्य समाधान म्हातुगडे ने कहा कि गांव की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह इस तालाब पर निर्भर है और इसका संरक्षण समय की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि तालाब का सौंदर्यीकरण, मजबूतीकरण और पर्यटन विकास होने से गांव के विकास को नई दिशा मिलेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सोनाली के इस ऐतिहासिक और गौरवशाली जलस्रोत के संरक्षण के लिए ग्रामीणों के सहयोग से प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
सोनाली के ऐतिहासिक पाझर तालाब को लेकर ग्रामीणों की यह पहल केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र विकास, पर्यटन संवर्धन और भविष्य की जल सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। अब सभी की निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई और प्रस्तावित विकास योजनाओं पर टिकी हैं।

Pratahkal Bureau
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