आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के बीच साधुग्राम में पारंपरिक अखाड़ों की भूमि व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया है। साधुग्राम में पारंपरिक अखाड़ों की जगहों के आराखड़ों में प्रशासन द्वारा किए गए बदलावों पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने तीव्र नाराजगी जताते हुए पारंपरिक व्यवस्था को यथावत रखने और अखाड़ों की परंपराओं का सम्मान करने की मांग की है।

इस दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्रपुरी महाराज, श्रीपंच निर्मोही अणी अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज, श्रीमहंत मुरारीदास महाराज, दिगंबर अखाड़े के श्रीमहंत बेंगवदास महाराज और श्रीमहंत माधवदास महाराज सहित अन्य संत-महंत मौजूद रहे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता महंत संजयदास महाराज ने पत्रकारों को इस संबंध में जानकारी दी।

सोमवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने तपोवन और रामकुंड क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान बताया गया कि साधुग्राम क्षेत्र में निर्मोही, दिगंबर और निर्वाणी, ये तीन अणी अखाड़े स्थित हैं। इस बार सिंहस्थ कुंभमेले में 1010 खालसे भाग लेंगे, जिनके साथ हजारों साधु-संत कुंभमेले में शामिल होंगे। इसे देखते हुए परिषद ने पारंपरिक स्थानों की पूर्ववत व्यवस्था बनाए रखने की मांग की। साथ ही कुंभमेले के लिए पानी, बिजली, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधाओं और यातायात व्यवस्था का नियोजन समय पर पूरा करने की अपेक्षा भी व्यक्त की।

सोमवार को ही संत-महंतों ने रामकुंड का भी निरीक्षण किया और वहां चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने गोदावरी नदी को स्वच्छ बनाए रखने, शाही मार्ग क्षेत्र में सीवेज का पानी नहीं जाने देने और इसकी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की। इसके अलावा शाही स्नान मार्ग से अतिक्रमण हटाकर अखाड़ों की शोभायात्राओं के लिए मार्ग पूरी तरह खुला रखने की आवश्यकता भी जताई।

इस दौरान प्रशासन की ओर से रामकाल पथ परियोजना का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से सिंहस्थ कुंभमेले के दौरान यातायात, दर्शन व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार होगा। साधु-महंतों ने परियोजना पर अपने सुझाव रखते हुए पूरे नियोजन में बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों में प्रशासन को पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था और संतों की परंपराओं का पूरा सम्मान करते हुए सभी व्यवस्थाओं का नियोजन करना चाहिए, ताकि कुंभमेले का आयोजन परंपरा और सुव्यवस्था के अनुरूप संपन्न हो सके।

Pratahkal Bureau

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