सिल्लोड तहसील के भवन परिसर में 50 दिनों से अधिक समय से बारिश नहीं होने के कारण खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। बारिश के अभाव में फसलों की वृद्धि रुक गई है और कई किसानों की फसलें सूख चुकी हैं। इस स्थिति को देखते हुए तहसील कार्यालय के राजस्व प्रशासन की ओर से सूखे जैसी स्थिति से प्रभावित किसानों की फसलों के पंचनामे शुरू किए गए हैं। किसानों का कहना है कि पंचनामा और मुआवजा प्रक्रिया के लिए विभिन्न दस्तावेज मांगे जाने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन की ओर से पंचनामे के लिए फार्मर आईडी, सात-बारा उतारा, जियो टैगिंग की गई खेत की तस्वीरें, बैंक खाते की जानकारी सहित विभिन्न दस्तावेज जमा करने को कहा जा रहा है। किसानों के अनुसार इन दस्तावेजों को जुटाने में प्रत्येक किसान को करीब 200 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। बारिश के अभाव में पहले से आर्थिक संकट झेल रहे किसानों पर अब पंचनामे के लिए दस्तावेज जुटाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

किसानों की मांग है कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार प्रशासन बिना किसी जटिल शर्त और दस्तावेजों के सभी प्रभावित किसानों की फसलों का पंचनामा करे और प्रत्येक नुकसानग्रस्त किसान को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

इस बीच, प्रशासन की ओर से 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान वाले किसानों को ही मुआवजे के लिए पात्र माने जाने की जानकारी सामने आ रही है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से कई किसानों की फसलों की वृद्धि पूरी तरह रुक गई है, जबकि कुछ फसलें पूरी तरह सूख चुकी हैं। ऐसे में फसल नुकसान का आकलन किन मानदंडों के आधार पर किया जाएगा और खेत की वास्तविक स्थिति को पंचनामे में कितना महत्व दिया जाएगा, इसे लेकर किसानों में असमंजस है। किसानों ने आशंका जताई है कि 33 प्रतिशत नुकसान के मानदंड के कारण कई प्रभावित किसान सहायता से वंचित रह सकते हैं।

भवन निवासी किसान रावसाहेब रामकृष्ण कलम ने बताया कि उनके दो एकड़ क्षेत्र में लगी मक्का की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और पूरी फसल जमीन पर गिर गई है। इसके बावजूद अभी तक उनके खेत में मक्का फसल का पंचनामा नहीं किए जाने की जानकारी उन्होंने दी। भवन परिसर के कई अन्य किसानों की भी ऐसी ही स्थिति है। कुछ किसानों की फसलें सूख गई हैं, जबकि कुछ की फसलें पूरी तरह जमीन पर गिर चुकी हैं।

एक ओर प्राकृतिक संकट के कारण किसान परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर पंचनामे के लिए दस्तावेज जुटाने, खर्च करने और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती उनके सामने है। किसानों की मांग है कि सरकार केवल कागजी मानदंडों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय अधिकारियों को प्रत्यक्ष खेतों में भेजकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराए।

किसानों ने मुख्यमंत्री की घोषणा का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए भवन परिसर सहित पूरे सिल्लोड तहसील के सभी नुकसानग्रस्त किसानों के सरसकट पंचनामे करने और किसी भी किसान को मुआवजे से वंचित नहीं रखने की जोरदार मांग की है।

प्रा. रुपेश ठाकूर, प्रतिनिधि, छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र

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Rupesh Thakur, छत्रपती संभाजी नगर

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