सिद्धनेर्ली और परिसर में पिछले कुछ दिनों से अघोरी और अनिष्ट प्रथाओं से संबंधित साहित्य मिलने के कारण नागरिकों में भय का वातावरण है। स्कूली विद्यार्थियों, महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही वाले रास्तों पर इस तरह का विचित्र साहित्य मिलने से परिसर में खलबली मच गई है।

कबाड़ पाणंद मार्ग पर टाचणियां खोसे हुए नींबू, काले कपड़े तथा विभिन्न प्रकार की सामग्री मिली है। इससे नागरिकों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। नागरिकों का कहना है कि इससे पहले भी इस परिसर में इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

करीब दो वर्ष पहले दूधगंगा नदी पात्र में मानव खोपड़ियां मिलने की सनसनीखेज घटना हुई थी। उस समय जानकारी दी गई थी कि जांच में इन खोपड़ियों का इस्तेमाल अघोरी गतिविधियों के लिए किए जाने की बात सामने आई थी। इसके अलावा परिसर में कई बार नींबू पर कागज लपेटकर उस पर व्यक्तियों के नाम लिखने, उस कागज में कीलें और टाचणियां चुभोने जैसी सामग्री मिलने की बात भी नागरिकों ने कही है।

इसके साथ ही बड़ी मात्रा में चावल, मूंग, काले तिल, लौंग, हल्दी-कुमकुम आदि पूजा सामग्री बिखरी हुई अवस्था में मिलने की बात सामने आई है। इससे पहले शासकीय कार्यालय के परिसर में भी इसी प्रकार की सामग्री मिलने की घटना हुई थी।

गांव के पास नदी किनारा, श्मशानभूमि और निर्जन स्थान होने के कारण इन जगहों का कुछ ढोंगी व्यक्तियों द्वारा गलत फायदा उठाए जाने की चर्चा परिसर में है। श्मशानभूमि, नदी किनारे और निर्जन स्थानों पर विभिन्न विधियां किए जाने की शिकायतें भी नागरिकों की ओर से की जा रही हैं। अंगारे-धूपारे, गंडे-ताबीज आदि के माध्यम से अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले प्रकार शुरू होने की नागरिकों में भावना है।

इस तरह की सामग्री मिलने से स्कूली विद्यार्थियों, महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भय का वातावरण बना हुआ है। संबंधित तंत्र को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करनी चाहिए। साथ ही अंधविश्वास निर्मूलन कानून का प्रभावी और कड़ा क्रियान्वयन कर ऐसे विकृत प्रकारों पर रोक लगाई जाए, ऐसी मांग सिद्धनेर्ली और परिसर के नागरिकों की ओर से की जा रही है।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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