लातूर: औसा तहसील के शिवली की पावन धरा पर 'नवसाला पावने वाले' (मन्नत पूरी करने वाले) श्री हनुमान की वार्षिक यात्रा का इस वर्ष अत्यंत भक्तिभाव और हर्षोल्लास के साथ भव्य शुभारंभ हुआ है। लातूर जिले की सीमा पर स्थित यह जागृत देवस्थान आज हजारों भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र बन चुका है। यात्रा के अवसर पर न केवल आसपास के गांवों से, बल्कि महाराष्ट्र के कोने-कोने से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

औसा तहसील के शिवली स्थित श्री हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ पिछले सौ-दो सौ वर्षों से निरंतर प्रज्वलित अखंड दीप है। समय के चक्र के साथ कई परिवर्तन आए, किंतु यह दिव्य दीपक आज भी उसी पवित्रता के साथ अखंड रूप से जल रहा है। इसी अखंड ज्योति के कारण इस यात्रा को एक विशेष ख्याति और आध्यात्मिकता प्राप्त हुई है। 'मन्नत पूरी करने वाले हनुमान' के रूप में इस देवस्थान की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है, जहाँ भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर और मन्नत पूरी होने पर आभार व्यक्त करने बड़ी श्रद्धा के साथ आते हैं।

परंपरा के अनुसार, प्रतिवर्ष हनुमान जयंती के पश्चात आने वाले पहले शनिवार से इस भव्य यात्रा का प्रारंभ होता है। उत्सव के पहले दिन तड़के गांव के श्रद्धालु अपने घरों से मंदिर तक दंडवत प्रणाम करते हुए पहुँचते हैं। प्रातः 4 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रभु का दही और दूध से अभिषेक किया जाता है, जिसके पश्चात श्री हनुमान की मूर्ति को स्वर्ण एवं रजत आभूषणों से सुसज्जित कर विशेष महापूजा संपन्न की जाती है। दोपहर के बाद गांव की महिलाएं एवं ससुराल गई हुई बेटियां अपने मायके की यादों को संजोए गाजे-बाजे के साथ मंदिर आती हैं और लोटांगण लगाकर अपनी श्रद्धा प्रकट करती हैं। दिनभर मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गुंजायमान रहता है।

इस यात्रा के उपलक्ष्य में विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तृत आयोजन किया गया है। 4 अप्रैल को तड़के 2 बजे से दंडवत, सुबह अभिषेक, अलंकार व महापूजा, शाम को प्रसाद वितरण और रात्रि में हरिजागर एवं भजन के कार्यक्रम आयोजित हैं। 5 अप्रैल को भव्य भारूड़ कार्यक्रम संपन्न होगा, जबकि 6 अप्रैल को मल्लों (पहलवानों) की कुश्ती का रोमांचक दंगल और शाम को भक्तिमय 'श्री लक्ष्मण शक्ति' सोहळा आयोजित किया जाएगा। अंततः 7 अप्रैल को श्री रामायण की महाआरती और विशाल महाप्रसाद के साथ इस यात्रा का विधिपूर्वक समापन होगा। शिवली की यह यात्रा मात्र एक धार्मिक समारोह नहीं, अपितु श्रद्धा, अटूट परंपरा और सामाजिक एकता का एक अनुपम संगम है, जो अखंड दीप की लौ की तरह प्रत्येक भक्त के मन में विशेष स्थान बनाए हुए है।

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