शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की खबरों के बीच संजय राउत ने खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगाए, अरविंद सावंत ने स्पीकर को पत्र लिखा। पढ़े रिपोर्ट

Shiv Sena UBT MP rebellion 2026 : महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक इस समय एक बहुत बड़ा सियासी भूचाल आया हुआ है, जहां शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में एक बार फिर साल 2022 की तरह ही एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक टूट होने की खबरें सामने आ रही हैं. 'ऑपरेशन टाइगर' के नाम से चर्चा में आए इस नए घटनाक्रम ने राज्य और केंद्र की राजनीति में भारी सरगर्मी बढ़ा दी है क्योंकि लोकसभा में उद्धव गुट के कुल नौ सांसदों में से छह सांसदों के पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने की पुख्ता जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने हॉर्स ट्रेडिंग का एक बेहद सनसनीखेज आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र की राजनीति में तहलका मचा दिया है. उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम एडवांस राशि दी गई है, जिसे उन्होंने लोकतंत्र के लिए बेहद घृणित और चौंकाने वाला कृत्य करार दिया है.

इस महासंकट की शुरुआत तब हुई जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए और उनके तुरंत बाद उद्धव गुट के छह प्रमुख सांसद भी देश की राजधानी पहुंच गए. सूत्रों के मुताबिक, इन संदेहास्पद बागी सांसदों की सूची में हिंगोली से नागेश बापुराव, यवतमाल वाशिम से संजय देशमुख, परभणी से संजय जाधव, शिरडी से भाऊसाहब वाकचौरे और मुंबई नॉर्थ ईस्ट से संजय दिना पाटिल शामिल हैं, जबकि नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम भी इस राजनीतिक बगावत की रेस में जोर-शोर से चल रहा है. शिंदे गुट के नेता कृपाल तुमाने और प्रताप सरनाइक ने इन अटकलों को और हवा देते हुए खुले तौर पर दावा किया है कि उद्धव के सात सांसद और करीब 16 विधायक लगातार उनके संपर्क में हैं और वे एकनाथ शिंदे के विकास कार्यों पर भरोसा जताते हुए जल्द ही उनके साथ मंच साझा करेंगे. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो यह पूरी रणनीति आगामी 19 जून को शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर अपनी वास्तविक सांगठनिक ताकत दिखाने के उद्देश्य से बेहद शांतिपूर्ण और सुनियोजित तरीके से रची गई है, जिसके तहत ये बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष संसद में एक अलग गुट बनाकर उसका विलय शिंदे गुट में करा सकते हैं.

इस अप्रत्याशित बगावत की आहट मिलते ही उद्धव ठाकरे खेमे ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए बेहद कड़े और आक्रामक कानूनी व कूटनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. पार्टी के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने तुरंत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक कड़ा आधिकारिक पत्र सौंपकर मांग की है कि संसद में केवल उनके संगठन को ही अधिकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए और किसी भी अलग हुए समूह को कोई पृथक दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा प्रदान न की जाए. इस पत्र के जरिए पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के सख्त प्रावधानों के तहत बागियों को अयोग्य ठहराने का कानूनी अधिकार सुरक्षित रखती है. दूसरी तरफ, सांसद अनिल देसाई ने भी स्पीकर से मुलाकात के बाद साफ कहा कि कानूनी रूप से केवल एक पूरी पार्टी का ही किसी अन्य दल में विलय संभव है, किसी टूटे हुए गुट को सीधे विलय की इजाजत नहीं दी जा सकती. हालांकि, इन कानूनी अपीलों के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा जैसे विपक्षी नेताओं ने भी भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों के दम पर क्षेत्रीय दलों को डराकर-धमकाकर उनके सांसद छीनने का सीधा आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर शिंदे गुट के नेताओं ने इसे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के प्रति पार्टी के भीतर लंबे समय से पनप रहे भारी असंतोष और अविश्वास का स्वाभाविक नतीजा बताया है.

Updated On 17 Jun 2026 3:30 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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