पछतावे की आग? उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने वाले 2 सांसद फिर थामेंगे 'मशाल'!
शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत ने दावा किया है कि एकनाथ शिंदे द्वारा वादे पूरे नहीं किए जाने के कारण दो बागी सांसद संसदीय दल की बैठक में शामिल होंगे।

शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे मुंबई में अपने आवास मातोश्री पर पार्टी सांसदों की बगावत के बाद बुलाई गई आपातकालीन संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए।
Maharashtra political crisis 2026 : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है, जहां उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों द्वारा बगावत कर एकनाथ शिंदे खेमे को समर्थन देने के फैसले के बाद अब 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपे जाने की खबरों के बीच, शिवसेना यूबीटी ने दावा किया है कि बागी रुख अपनाने वाले छह में से दो सांसद वापस लौट सकते हैं। उद्धव गुट को अब भी पूरी उम्मीद है कि उनके ये साथी शिंदे गुट के साथ नहीं गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है, जिससे आज होने वाली संसदीय दल की बैठक बेहद संवेदनशील और निर्णायक हो गई है।
इस राजनीतिक उठापटक के बीच शिवसेना यूबीटी के लोकसभा सांसद अरविंद सावंत ने व्हिप जारी कर अपनी पार्टी के संसदीय दल की बैठक बुलाई है। सावंत ने 'ऑपरेशन टाइगर' पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उन्हें अपने सांसदों की निष्ठा पर पूरा भरोसा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अरविंद सावंत ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि बगावत की राह पर निकले छह सांसदों में से दो के वादे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पूरे नहीं किए हैं, जिसके चलते उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए। यूबीटी नेतृत्व को पूरा विश्वास है कि वादे टूटने से नाराज ये दोनों सांसद आज होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में अवश्य शामिल होंगे। हालांकि, पार्टी के भीतर अब भी इस बात को लेकर पूरी तरह से स्थिति साफ नहीं है कि अंततः कितने सांसद उनके पाले में मजबूती से टिके रहेंगे।
वैधानिक और आधिकारिक मोर्चे पर देखा जाए तो अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने छह सांसदों के हस्ताक्षरों को वैधानिक रूप से प्रस्तुत कर दिया है या लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को यह पत्र आधिकारिक तौर पर सौंपा जा चुका है। इस बीच, किसी भी तरह की गुटबाजी और बयानों से बचने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बागी सांसदों के खिलाफ फिलहाल कोई भी तीखी टिप्पणी न करें। आज गुरुवार, 18 जून को सुबह 11:00 बजे प्रस्तावित इस बैठक को सांसदों की वफादारी के अग्निपरीक्षण के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि व्हिप के बाद होने वाली इस उपस्थिति से ही पार्टी की आगे की कानूनी और राजनीतिक भूमिका तय हो सकेगी।
इस पूरे 'ऑपरेशन टाइगर' की पटकथा पिछले कुछ दिनों में तेजी से लिखी गई, जिसकी शुरुआत 10 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच हुई रणनीतिक चर्चा से हुई थी। इसी दिन अमित शाह और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात के बाद इस ऑपरेशन को हरी झंडी दी गई, जिसके तुरंत बाद उद्धव गुट के सांसद दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में एकनाथ शिंदे से मिलने पहुंचे। इसके बाद 14 जून को उद्धव ठाकरे द्वारा मातोश्री पर बुलाई गई बैठक में जहां कुछ सांसद प्रत्यक्ष और कुछ ऑनलाइन शामिल हुए, वहीं तीन प्रमुख सांसद अनुपस्थित रहे। 16 जून की रात को छह सांसदों के अचानक दिल्ली रवाना होने और 17 जून को स्वतंत्र गुट बनाने की घोषणा के साथ ही यह विवाद चरम पर पहुंच गया। अब आज होने वाली 11:00 बजे की बैठक न केवल यह तय करेगी कि शिवसेना का 'ऑपरेशन टाइगर' सफल हुआ या नहीं, बल्कि इससे महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय होगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
