शिरपुर में विद्यार्थियों की चुनौतियों पर प्रा. डॉ. सोनाली बागुल का प्रेरणादायी व्याख्यान संपन्न
शिरपुर में प्रा. पी. एस. अंतुर्लीकर अण्णा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित व्याख्यान में प्रा. डॉ. सोनाली बागुल ने विद्यार्थियों की चुनौतियों, शिक्षा, संस्कार, लक्ष्य निर्धारण और जीवन कौशल पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।

तस्वीर में शिरपुर के आदर्श नगर स्थित सभागृह में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान वक्ता, संस्था के पदाधिकारी और उपस्थित गणमान्य व्यक्ति नजर आ रहे हैं।
शिरपुर। आदि जनता विद्या प्रसारक संस्था में प्रा. पी. एस. अंतुर्लीकर अण्णा प्रतिष्ठान शिरपुर की ओर से धुले की प्रा. डॉ. सोनाली बागुल का विद्यार्थियों के सामने आने वाली चुनौतियों विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संस्था के आदर्श नगर स्थित सभागृह में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिष्ठान के अध्यक्ष तथा आदि जनता विद्या प्रसारक संस्था के अध्यक्ष मा. प्रा. पी. एस. अंतुर्लीकर ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत शिवराम भिमजी अंतुर्लीकर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं द्वारा ईशस्तवन और स्वागत गीत के गायन से हुई। इसके बाद म. ज्योतिबा फुले और क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाओं का पूजन कर दीप प्रज्वलन किया गया।
व्याख्याता प्रा. डॉ. सोनाली बागुल ने विद्यार्थियों के सामने आने वाली चुनौतियों विषय पर मार्गदर्शन करते हुए कहा कि विद्यार्थी ही शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। बच्चों को सही उम्र में उचित संस्कार दिए जाने चाहिए। उन्होंने विभिन्न चरणों में जन्मी पीढ़ियों का विश्लेषण करते हुए बताया कि दो पीढ़ियों के बीच बढ़ता जनरेशन गैप मतभेदों का कारण बनता है। इसके लिए समायोजन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सामने प्रतियोगिता, लक्ष्य, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, स्वपरिचय, टीम वर्क, समय प्रबंधन और सोशल मीडिया जैसी कई चुनौतियां हैं। इन विषयों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक, अभिभावक और समाज को विद्यार्थियों को समझना चाहिए। जीवन कौशल और व्यवहार कौशल प्रदान करते समय यह विचार जरूरी है कि विद्यार्थी केवल परीक्षार्थी न बनकर ज्ञानार्थी कैसे बने और उसकी बौद्धिक क्षमता के अनुसार उसका लक्ष्य कैसे निर्धारित किया जाए।
प्रा. डॉ. सोनाली बागुल ने कहा कि भविष्य में विद्यार्थियों का मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि उन्होंने कितना ज्ञान प्राप्त किया है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह होगा कि वे प्राप्त ज्ञान का किस प्रकार उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह बात समझाई। साथ ही प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित की जा रही व्याख्यानमाला की उन्होंने सराहना की।
अध्यक्षीय भाषण में प्रा. पी. एस. अंतुर्लीकर ने कहा कि व्याख्यान वैचारिक भूख को शांत करते हैं और यह समाज की एक आवश्यकता है। प्रतिष्ठान के माध्यम से हम इसके लिए प्रयास कर रहे हैं और आगे भी समाज के रसिक बंधु-भगिनी के लिए बड़े नामांकित वक्ताओं के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज के व्याख्यान में प्रा. डॉ. सोनाली बागुल ने विद्यार्थी, शिक्षक और पालकों सभी को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। इसके बाद उन्होंने उपस्थित मान्यवरों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर संस्था के संचालक अनिरुद्ध अंतुर्लीकर, सर्वश्री प्रा. डॉ. फुला बागुल, एम. के. भामरे, प्रा. डॉ. नागोजीराव डोंगरे, पूर्व मुख्याध्यापक नंदलाल कश्यप, धनराज पवार, एन. एच. महाजन, सौ. शिल्पा जैन, जगदीश कलाल, पालक बंधू-भगिनी तथा सुपामाय शिवराम अंतुर्लीकर प्राथमिक विद्यालय के मुख्याध्यापक आर. जी. देसाई, शिवराम भिमजी अंतुर्लीकर माध्यमिक विद्यालय के मुख्याध्यापक आई. पी. चव्हाण, सुपाबाई शिवराम अंतुर्लीकर निजी आईटीआई वाघाडी के प्राचार्य शोएब शेख, शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का सूत्रसंचालन जे. बी. पाटील ने किया, जबकि आभार आर. एस. नगराळे ने व्यक्त किया।

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