महाराष्ट्र के धुले जिले के शिरपुर तालुका में विद्यार्थियों की बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान को मजबूत करने के उद्देश्य से निपुण मुख्याध्यापक कार्यशाला आयोजित की गई। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), धुले और जिला परिषद शिक्षा विभाग, धुले के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बाबासाहेब बेलदार (भा.प्र.से.) ने मुख्याध्यापकों से सीधे संवाद कर स्कूलों में निपुण कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति, निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के प्रयासों, बेहतर शैक्षणिक प्रथाओं और कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं की जानकारी ली।

कार्यशाला का आयोजन दो सत्रों में दो अलग-अलग स्थानों पर किया गया। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक पहला सत्र पी.बी.एम. म्युनिसिपल हाईस्कूल, शिरपुर में आयोजित हुआ। इसमें तालुका के निजी प्रबंधन वाले प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के मुख्याध्यापक शामिल हुए। वहीं, दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक दूसरा सत्र राजगोपाल भंडारी हॉल, मेन बिल्डिंग, शिरपुर में आयोजित किया गया। इसमें जिला परिषद स्कूलों, आश्रमशालाओं और नगरपालिका स्कूलों के मुख्याध्यापकों ने भाग लिया। दोपहर के सत्र में शिरपुर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले सभी विस्तार अधिकारी, केंद्र प्रमुख और साधन व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

दोनों सत्रों में मुख्य मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बाबासाहेब बेलदार ने मुख्याध्यापकों के साथ खुलकर चर्चा की। उन्होंने स्कूलों में निपुण कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति, निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों, स्कूल स्तर पर अपनाई जा रही बेस्ट प्रैक्टिसेस और विभिन्न समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। साथ ही, इन चुनौतियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन दिया और स्कूलों में निपुण लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के उपायों पर चर्चा की।

कार्यशाला में विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान विकसित करने के लिए विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। केंद्र प्रमुख सुनील जाधव ने निपुण कार्यक्रम से जुड़ी तकनीकी जानकारी, प्रतिभागियों की शंकाओं के समाधान और सफलता की कहानियां लिखने के विषय में जानकारी दी। जिला परिषद के प्राथमिक विभाग की शिक्षा विस्तार अधिकारी मनीषा वानखेड़े ने निपुण से संबंधित शासन निर्णय की जानकारी दी और निपुण के विभिन्न स्तरों से जुड़े वीडियो दिखाकर मार्गदर्शन किया।

डायट की अधिव्याख्याता डॉ. वनमाला पवार ने निपुण कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति, विद्यार्थियों के निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंच पाने के कारणों और उनके समाधान के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्कूलों में पठन, लेखन, संख्याज्ञान और संख्याओं पर आधारित क्रियाओं से जुड़ी बेहतर शैक्षणिक प्रथाओं के आदान-प्रदान और उनके प्रस्तुतीकरण पर भी मार्गदर्शन किया।



शिक्षा विस्तार अधिकारी डॉ. नीता सोनवणे ने विद्यार्थियों को निपुण के निर्धारित स्तर तक पहुंचाने के लिए शैक्षणिक सामग्री का प्रभावी उपयोग करने के तरीकों की जानकारी दी। कार्यशाला में अध्ययन निष्पत्तियों को प्राप्त करने के लिए प्रभावी योजना बनाने, शैक्षणिक सामग्री का उचित उपयोग करने और निपुण भारत अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में मुख्याध्यापकों की भूमिका को अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और स्कूलों के अनुभवों के आदान-प्रदान से मुख्याध्यापकों को निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिशा मिली। कार्यशाला में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों की बुनियादी दक्षताओं को विकसित करने और स्कूल स्तर पर आने वाली चुनौतियों के समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए डॉ. वनमाला पवार, मनीषा वानखेड़े, सुनील जाधव और डॉ. नीता सोनवणे ने विशेष प्रयास किए। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के अधिव्याख्याता सुभाष वसावे और योगेश्वर जाधव के साथ शिरपुर तालुका के सभी केंद्र प्रमुखों और विस्तार अधिकारियों का भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला।

कार्यशाला के आयोजन में डायट की प्राचार्या सुचेता पाटील, शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) वैभव बाचकर, शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) डॉ. मनीष पवार और शिरपुर पंचायत समिति के समूह शिक्षा अधिकारी विठ्ठल घुगे का मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बाबासाहेब बेलदार (भा.प्र.से.) के मार्गदर्शन में कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। अंत में अनिल बाविस्कर ने आभार व्यक्त कर कार्यशाला का समापन किया।

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