शिरपूर में बारिश की कमी से खरीफ संकट गहराया, दोबारा बुवाई का खतरा; उड़द-मूंग की बुवाई का समय समाप्त
शिरपूर तालुका में बारिश की कमी से खरीफ फसल संकट में है। उड़द-मूंग की बुवाई का समय समाप्त हो चुका है, जबकि किसान दोबारा बुवाई की आशंका से चिंतित हैं।

शिरपुर के खेत में लगी कपास की फसल, जहां पर्याप्त बारिश न होने से फसलों की वृद्धि प्रभावित हो रही है।
शिरपूर तालुका में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से इस वर्ष खरीफ सीजन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। कम नमी में बुवाई करने वाले किसानों की महंगी बीज, खाद और मेहनत पर पानी फिरने की आशंका बढ़ गई है। मौसम की अनिश्चितता के कारण किसान पूरी तरह परेशान हैं और अब भी उनकी निगाहें अच्छी बारिश की उम्मीद में आसमान पर टिकी हुई हैं।
शिरपूर तालुका के किसानों की वार्षिक आय का बड़ा आधार खरीफ फसलों का उत्पादन है। इस वर्ष जून महीने से ही बारिश ने निराश किया। जून में केवल कुछ सीमित गांवों में ही हल्की बारिश होने के कारण वहां किसी तरह बुवाई पूरी की जा सकी। इसके बाद लंबे समय तक बारिश नहीं होने से खेतों में उगी कोमल फसलें मुरझाने लगी हैं। हालात संभालने के लिए किसान लगातार खेतों का रुख कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर फसलों में निराई-गुड़ाई का काम चल रहा है, जबकि अधिकांश खेत अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले छह से सात वर्षों में तालुका में उड़द और मूंग की खेती का रकबा लगातार कम होता गया है। इन फसलों को बेहतर बाजार भाव मिलने के कारण किसान इनकी बुवाई को प्राथमिकता देते थे, लेकिन इस वर्ष बारिश में देरी होने से उड़द और मूंग की बुवाई का तकनीकी समय समाप्त हो चुका है। किसानों के परिवारों के दैनिक भोजन में मूंग की दाल का विशेष महत्व होता है, लेकिन इस वर्ष बुवाई नहीं होने से उन्हें पूरे वर्ष तूर की दाल पर निर्भर रहना पड़ सकता है। हालांकि तकनीकी रूप से 31 जुलाई तक सोयाबीन, तूर और सूरजमुखी की बुवाई संभव है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान चिंता में हैं।
तालुका में अभी भी समान रूप से वर्षा नहीं हुई है। कहीं कम तो कहीं अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं बन पाई हैं। बीज और खाद पर बड़ी राशि खर्च करने के कारण कुछ किसान जल्दबाजी में बुवाई कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी के बिना की गई बुवाई खराब होने की आशंका रहती है, जिससे किसानों को दोबारा बुवाई का संकट झेलना पड़ सकता है। वर्तमान में पुनर्वसु नक्षत्र के दौरान हल्की लगातार बारिश की उम्मीद थी, लेकिन इसके बजाय तेज धूप और बादलों का आना-जाना जारी है।
शिरपूर तालुका में इस वर्ष खरीफ सीजन का कुल बुवाई क्षेत्र 72 हजार 427 हेक्टेयर निर्धारित है। बारिश की अनिश्चितता के कारण अब तक केवल 55 हजार 862 हेक्टेयर यानी 77.13 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुवाई पूरी हो सकी है। शेष लगभग 22.87 प्रतिशत क्षेत्र अब भी बिना बुवाई के पड़ा हुआ है।
फसलवार बुवाई की स्थिति में कपास 30,466 हेक्टेयर, मक्का 20,018 हेक्टेयर, सोयाबीन 2,097 हेक्टेयर, बाजरा 1,790 हेक्टेयर, ज्वार 1,183 हेक्टेयर, तूर 826 हेक्टेयर, मूंग 759 हेक्टेयर और उड़द 482 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई है। फलबाग और सब्जी फसलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
शिरपूर के तालुका कृषि अधिकारी कैलास गोपाल ने कहा, "खेती के व्यवसाय में प्रकृति का समय पर साथ मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष समय पर बारिश नहीं होने से बुवाई की स्थिति नाजुक बनी हुई है। यदि जमीन में पर्याप्त नमी नहीं होगी और बुवाई की जाएगी तो अंकुरण क्षमता प्रभावित हो सकती है। आने वाले कुछ दिनों में बारिश होने की उम्मीद है। 31 जुलाई तक तूर, सोयाबीन और सूरजमुखी की बुवाई की जा सकती है। इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और कम से कम 75 से 100 मिमी बारिश के बाद ही पर्याप्त नमी होने पर बुवाई करनी चाहिए।"
बारिश की लगातार कमी के कारण शिरपूर तालुका में खरीफ सीजन की स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों की वर्षा पर ही इस सीजन की सफलता काफी हद तक निर्भर रहेगी।

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