शेरज बुजरूक गांव में सड़कों और पुलों का अभाव, अधूरी श्मशानभूमि से ग्रामीण परेशान, अनशन की चेतावनी
महाराष्ट्र के कोरपना तालुका स्थित शेरज बुजरूक गांव में सड़कों की बदहाली, नालों पर पुलों की कमी और अधूरी श्मशानभूमि से ग्रामीण परेशान हैं। बारिश में आवागमन बाधित होने और मरीजों को अस्पताल ले जाने में परेशानी के बीच ग्रामीणों ने अनशन की चेतावनी दी है।

तस्वीर में महाराष्ट्र के कोरपना तालुका स्थित शेरज बुजरूक गांव के ग्रामीण बदहाल सड़क और नाले का निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
महाराष्ट्र के कोरपना तालुका के शेरज बुजरूक गांव में सड़कों की बदहाली, नालों पर पुलों की कमी और श्मशानभूमि का काम अधूरा होने से ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी इन समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने शासन और संबंधित प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है।
गांव में आने-जाने के लिए चार मार्ग उपलब्ध हैं, लेकिन इन सभी मार्गों के दोनों ओर बड़ी संख्या में पेड़-पौधे और झाड़ियां उग आई हैं। इससे वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों की मांग है कि सड़कों के दोनों ओर उगी झाड़ियों और पेड़-पौधों को तत्काल हटाकर रास्तों को सुरक्षित बनाया जाए।
बरसात में गांव का संपर्क प्रभावित
शेरज बुजरूक गांव तक पहुंचने वाले चारों मार्गों पर नालों के ऊपर आवश्यक पुल नहीं होने से बारिश के मौसम में आवागमन मुश्किल हो जाता है। नालों में पानी बढ़ने पर ग्रामीणों के लिए गांव से बाहर निकलना और गांव तक पहुंचना कठिन हो जाता है। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, किसानों और बीमार ग्रामीणों पर पड़ता है। बीमार लोगों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने में भी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने संबंधित मार्गों पर पुलों के निर्माण की मांग की है।
श्मशानभूमि का काम भी अधूरा
गांव में सड़कों की खराब स्थिति और नालों पर पुलों की कमी के साथ श्मशानभूमि का काम अधूरा होने का मुद्दा भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि इन बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए शासन और संबंधित प्रशासन को तत्काल निर्णय लेकर धरातल पर काम शुरू करना चाहिए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपने अधिकारों और मांगों के लिए अनशन पर बैठेंगे। अब शेरज बुजरूक के ग्रामीणों की इन मांगों पर शासन और संबंधित प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

