पिछले लगभग 15 वर्षों से लंबित पड़ी शाहूकालीन जलापूर्ति पाइपलाइन बदलने की परियोजना को आखिरकार मंगलवार को धरातल पर उतार दिया गया। लंबे समय से प्रतीक्षित इस महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में श्रेय लेने की राजनीति को लेकर नया विवाद भी सामने आ गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

जानकारी के अनुसार, पूर्व नगरसेवक किरण नकाते और वर्तमान नगरसेविका माधुरी नकाते द्वारा लगातार किए गए प्रयासों और अनुवर्ती कार्रवाई के चलते यह परियोजना आगे बढ़ सकी। हालांकि, परियोजना के औपचारिक शुभारंभ से पहले ही एक पूर्व नगरसेविका द्वारा स्वतंत्र रूप से उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए जाने की घटना ने विवाद को जन्म दे दिया।

इस घटनाक्रम पर स्थानीय नागरिकों ने तीखी नाराजगी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि वर्षों तक परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करने वाले लोग कौन थे और उद्घाटन का श्रेय लेने के लिए आगे आने वाले कौन हैं। नागरिकों की नाराजगी के बाद अंततः इस महत्वपूर्ण पाइपलाइन प्रतिस्थापन कार्य का आधिकारिक शुभारंभ नगरसेविका माधुरी नकाते के हाथों संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश सालोखे, पूर्व नगरसेवक किरण नकाते, गणेश देसाई तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पूर्व नगरसेवक किरण नकाते ने बताया कि संबंधित पाइपलाइन शाहूकालीन दौर की है और इसकी सीमा रेस्क्यूज नाका से लेकर जवाहरनगर क्षेत्र तक फैली हुई है। कई दशकों से उपयोग में रही इस पाइपलाइन में विभिन्न स्थानों पर होने वाली लीकेज की जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध थी। नागरिकों को लगातार हो रही परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से इस परियोजना के लिए निरंतर प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप अब यह कार्य शुरू हो सका है।

वहीं, परियोजना के वास्तविक कार्यारंभ से पहले ही श्रेय को लेकर शुरू हुई राजनीतिक चर्चा भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वालों को दरकिनार कर केवल प्रचार के उद्देश्य से उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में विकास कार्यों का श्रेय लेने या बिना समन्वय के उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित करने के प्रयास किए गए, तो इसका विरोध और अधिक मुखर रूप से किया जाएगा।

एक ओर जहां 15 वर्षों से लंबित महत्वपूर्ण जलापूर्ति परियोजना के शुरू होने से नागरिकों में राहत और संतोष का माहौल है, वहीं दूसरी ओर श्रेय की राजनीति को लेकर उत्पन्न विवाद ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के शुभारंभ पर सवालों और चर्चाओं की नई परत जोड़ दी है। अब शहर में विकास कार्यों के साथ-साथ राजनीतिक श्रेयवाद की यह बहस भी चर्चा के केंद्र में बनी हुई है।

Pratahkal Bureau

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