लातूर महापालिका में बोगस नियुक्तियों का सनसनीखेज भंडाफोड़, छह युवाओं की RTI ने खोला बड़ा घोटाला
लातूर महापालिका में लिपिक पद की छह फर्जी नियुक्तियाँ सामने आने से शहर में सनसनी फैल गई। आरटीआई के जवाब में महापालिका ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई नियुक्ति दर्ज ही नहीं है। नकली हस्ताक्षर और मुहर के इस्तेमाल का खुलासा होने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। फर्जी आदेशों के पीछे छिपे रैकेट की तलाश जारी है।

लातूर शहर में वह सपना, जिसे छह युवाओं ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि समझा था, अचानक एक गहरी सच्चाई में बदल गया। लातूर महानगरपालिका में लिपिक पद के लिए मिली नियुक्ति के आदेश पहले तो इन युवाओं के लिए नौकरी का रास्ता लगे, लेकिन दस्तावेजों पर संदेह होने पर जब उन्होंने सूचना अधिकार के तहत जवाब मांगा, तो एक ऐसा घोटाला सामने आया जिसने पूरे प्रशासन को झकझोर कर रख दिया।
शुभम बाळासाहेब गरड, ज्ञानेश्वरी रवी गरड, मारुति भगवान शिवणे, आदित्य बंकट भिंगे, सोमनाथ लक्ष्मण पांचाळ और बापूराव कोंडिराम हुडे—इन छह युवाओं को लातूर महापालिका में लिपिक पद के लिए चयनित किए जाने का आदेश जारी किया गया था। आदेश आधिकारिक दिखता था, मुहर और हस्ताक्षर तक आयुक्त मानसी मीना के नाम पर थे। लेकिन नियुक्ति आदेश में कई विसंगतियाँ होने के कारण युवाओं ने RTI दायर कर इसकी सत्यता जांचने का निर्णय लिया।
RTI के जवाब ने इस मामले को पूरी तरह पलट दिया। महापालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी नियुक्ति का रिकॉर्ड उनके विभाग में मौजूद ही नहीं है। इसका मतलब था कि सभी नियुक्ति आदेश फर्जी थे और उनके दस्तावेजों पर लगाए गए हस्ताक्षर तथा मुहर भी बनावट थीं।
सहायक आयुक्त नंदकिशोर तापडे और आस्थापना विभाग प्रमुख अभिमन्यु पाटील की प्राथमिक जांच में यह निष्कर्ष निकला कि आयुक्त मानसी मीना के नाम का फर्जी हस्ताक्षर और नकली मुहर का इस्तेमाल कर इन आदेशों को तैयार किया गया था। इस गंभीर खुलासे के बाद लातूर महापालिका ने तुरंत शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। आयुक्त मानसी मीना ने मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा तापडे और पाटील को सौंप दिया है, जबकि पुलिस ने भी ठगी के इस रैकेट की तह तक जाने के लिए छानबीन तेज कर दी है।
आस्थापना विभाग प्रमुख अभिमन्यु पाटील ने कहा कि ये नियुक्तियाँ उनके कार्यालय से जारी नहीं की गई हैं और यह स्पष्ट है कि आदेशों में उपयोग किए गए हस्ताक्षर और मुहर नकली हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पुलिस जांच के जरिए इस धोखाधड़ी के पीछे छिपे असली चेहरों का जल्द ही खुलासा होगा।
लातूर में सामने आए इस बोगस नियुक्ति प्रकरण ने नौकरी की उम्मीद में जी-जान से मेहनत करने वाले युवाओं के साथ ही पूरे शहर को हिला दिया है। अब सवाल यह है कि इन फर्जी नियुक्तियों के पीछे कौन सा संगठित गिरोह सक्रिय है और इस रैकेट का मास्टरमाइंड कौन है। पुलिस जांच से शहर को जल्द ही इस जालसाजी का सच जानने की उम्मीद है।
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