गुंडेवाडी ग्रामपंचायत में कर अपहार का सनसनीखेज मामला: बनावट रसीदों से लाखों की वसूली, सरपंच पर अदालत के आदेश से एफआईआर दर्ज
जालना जिले के गुंडेवाडी ग्रामपंचायत में बनावट रसीदों से कर वसूली कर लाखों रुपये के कथित अपहार का मामला सामने आया है। सरपंच मनोहर ज्ञानेश्वर पोटे के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर चंदनझिरा पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में रसीदें और हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं।

जालना जिले के गुंडेवाडी गांव में ग्रामपंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बनावट रसीदों के जरिए ग्रामपंचायत कर की वसूली कर सरकारी धन के कथित अपहार के आरोप में गुंडेवाडी के सरपंच के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। यह प्रकरण न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पंचायत स्तर की पारदर्शिता पर भी गहरा असर डालने वाला माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुंडेवाडी निवासी नारायण दगडुजी गजर ने शनिवार, 13 दिसंबर 2025 को चंदनझिरा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गुंडेवाडी ग्रामपंचायत के सरपंच मनोहर ज्ञानेश्वर पोटे ने ग्रामपंचायत कार्यालय की बनावट रसीद पुस्तिका छपवाकर उसके माध्यम से गांव की सीमा में स्थित निजी कंपनियों से ग्रामपंचायत कर की वसूली की। आरोप है कि यह राशि पंचायत के आधिकारिक खाते में जमा न कर उसका निजी तौर पर अपहार किया गया।
इस मामले की पृष्ठभूमि में शिकायतकर्ता द्वारा 9 जनवरी 2024 को जालना के गट विकास अधिकारी कार्यालय में भी लिखित शिकायत दी गई थी। उस शिकायत के आधार पर की गई विभागीय जांच की रिपोर्ट 3 अगस्त 2023 को प्रस्तुत की गई। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जिन रसीदों के आधार पर कर वसूला गया, वे ग्रामपंचायत के आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, उन रसीदों पर किए गए हस्ताक्षर संबंधित ग्रामसेवकों के नहीं पाए गए, जिससे रसीदों के पूरी तरह से फर्जी होने की पुष्टि हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि राजलक्ष्मी प्राइवेट लिमिटेड से वर्ष 2021-22 के ग्रामपंचायत कर के नाम पर 80 हजार रुपये वसूले गए, जबकि अभय न्यूट्रिशन प्राइवेट लिमिटेड से अप्रैल 2019 से मार्च 2022 की अवधि के दौरान कुल 2 लाख 40 हजार रुपये की वसूली की गई। इन सभी लेन-देन में प्रयुक्त रसीदों को जांच समिति ने बनावट करार दिया है।
मामले में एक अन्य गंभीर आरोप गट क्रमांक 105 में निर्माण कार्य के लिए जारी किए गए अनापत्ति प्रमाणपत्र से जुड़ा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रमाणपत्र पर तत्कालीन ग्रामसेवक के जाली हस्ताक्षर किए गए थे और यह प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध पाई गई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जालना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय ने 10 दिसंबर 2025 को सरपंच के खिलाफ अपराध दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद चंदनझिरा पुलिस थाने में सरपंच मनोहर ज्ञानेश्वर पोटे के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस द्वारा आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला ग्रामपंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को लेकर एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है, जिस पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।
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