वाळवे खुर्द स्कूल में छात्रों का बस्ते का बोझ हुआ हल्का, हर विद्यार्थी को मिला लॉकर
वाळवे खुर्द जिला परिषद स्कूल में 300 विद्यार्थियों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए हर छात्र को अलग लॉकर मिला, किताबें स्कूल में रहेंगी सुरक्षित।

तस्वीर में वाळवे खुर्द जिला परिषद स्कूल की कक्षा के भीतर छात्र-छात्राएं लोहे के लॉकर के पास खड़े हैं और उनके साथ शिक्षक भी मौजूद हैं।
कागल तालुका के वाळवे खुर्द स्थित जिला परिषद प्राथमिक स्कूल ने विद्यार्थियों के कंधों पर बढ़ते बस्ते के बोझ को कम करने के लिए अभिनव पहल की है। स्कूल के प्रत्येक कक्षा-कक्ष में लोहे के लॉकर की व्यवस्था की गई है और हर विद्यार्थी को अलग कप्पा दिया गया है। इससे छात्र अपनी किताबें, कॉपियां और शैक्षणिक सामग्री स्कूल में ही सुरक्षित रख पा रहे हैं और रोजाना भारी बस्ता लेकर आने-जाने की जरूरत कम हो गई है।
वाळवे खुर्द की इस जिला परिषद प्राथमिक स्कूल में पहली से सातवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं और करीब 300 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यार्थियों को प्रतिदिन स्कूल आते और घर जाते समय भारी बस्ता पीठ पर लेकर जाना पड़ता था। इससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अभिभावक लगातार स्कूल को सुझाव दे रहे थे।
शिक्षकों ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान के लिए चर्चा की। इसी दौरान प्रत्येक कक्षा में लॉकर की सुविधा उपलब्ध कराने की संकल्पना सामने आई। शुरुआत में प्रायोगिक आधार पर स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों की पहल से एक कक्षा में लोहे का लॉकर लगाया गया। इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अन्य कक्षाओं के लिए भी स्कूल प्रबंधन समिति से लॉकर उपलब्ध कराने की मांग की गई।
इसके बाद वाळवे खुर्द ग्राम पंचायत ने 17वें वित्त आयोग के फंड से स्कूल की सभी कक्षाओं के लिए लोहे के लॉकर उपलब्ध कराए। इन लॉकरों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार अलग-अलग कप्पे बनाए गए हैं और प्रत्येक विद्यार्थी को एक कप्पा आवंटित किया गया है। विद्यार्थी अपनी किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री इन कप्पों में रखते हैं। कप्पे में ताला लगाने की सुविधा भी है और संबंधित विद्यार्थी के पास उसकी चाबी रहती है।
इस व्यवस्था से विद्यार्थियों की शैक्षणिक सामग्री सुरक्षित रहने के साथ ही उन्हें जरूरत के अनुसार ही सामग्री घर ले जाने की सुविधा मिल रही है। इसके चलते विद्यार्थियों के बस्ते का वजन कम हुआ है और वे अधिक आरामदायक तरीके से स्कूल आ-जा पा रहे हैं। अभिभावकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना की है।
इस अभिनव पहल के लिए ग्राम पंचायत, स्कूल प्रबंधन समिति, पूर्व विद्यार्थियों और शिक्षकवृंद का महत्वपूर्ण सहयोग मिला है। जिला परिषद स्कूल के विद्यार्थियों के बस्ते का बोझ कम करने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को अलग लॉकर उपलब्ध कराने की यह पहल राज्य की अन्य स्कूलों के लिए भी अनुकरणीय बन रही है।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
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ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
