अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण की मांग को लेकर पुणे–मुंबई लॉन्ग मार्च का ऐलान, 24 जून को आज़ाद मैदान में होगा समापन
अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण की मांग को लेकर पुणे से मुंबई तक विशाल लॉन्ग मार्च की घोषणा हुई है। 17 जून से शुरू होकर 24 जून को आज़ाद मैदान में होने वाला यह आंदोलन सामाजिक न्याय की नई हलचल पैदा कर रहा है।

लातूर के पत्रकार भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में उपस्थित राज क्षीरसागर, अधिवक्ता टी. एन. कांबळे और अन्य पदाधिकारी, जिन्होंने 24 जून को मुंबई के आझाद मैदान में होने वाले मोर्चे की जानकारी दी।
लातूर में आयोजित एक पत्रकार परिषद के दौरान अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण की मांग को लेकर एक बड़े जनांदोलन की घोषणा की गई, जिसने सामाजिक न्याय की बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अण्णाभाऊ साठे क्रांती सेना की ओर से बताया गया कि उपेक्षित और वंचित अनुसूचित जाति घटकों को न्याय दिलाने तथा सर्वोच्च न्यायालय के 1 अगस्त 2024 के निर्णय के अनुरूप उपवर्गीकरण लागू करने की मांग को लेकर पुणे से मुंबई तक लॉन्ग मार्च निकाला जाएगा।
इस आंदोलन की शुरुआत 17 जून को पुणे स्थित आद्य क्रांतिगुरू देशपिता लहुजी बाबा साळवे के समाधि स्थल से होगी। यह मार्च विभिन्न जिलों से गुजरते हुए 24 जून को मुंबई के ऐतिहासिक आझाद मैदान में एक विशाल मोर्चे और आंदोलन के रूप में समाप्त होगा। संगठन का कहना है कि इस आंदोलन का उद्देश्य सामाजिक न्याय और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।
पत्रकार परिषद में जानकारी दी गई कि इस आंदोलन को होल्हार, बुरूड, मेहतर, भंगी, हिंदू खाटीक, कैकाडी, चांभार, ढोर, मोची सहित कई उपेक्षित जातियों और सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो रहा है। इससे आंदोलन को व्यापक जनाधार मिलने की बात भी सामने आई है।
इस लॉन्ग मार्च का नेतृत्व लोकशाहीर डॉ. अण्णाभाऊ साठे के परिजनों द्वारा किया जाएगा। इनमें उनकी सुनबाई सावित्रीमाई साठे, नातू सचिनभाऊ साठे, गणेशभाऊ भगत, अण्णाभाऊ साठे के अन्य परिजन, अधिवक्ता टी. एन. कांबळे तथा राज क्षीरसागर शामिल हैं। लातूर में आयोजित पत्रकार परिषद के दौरान राज क्षीरसागर ने जिले के कार्यकर्ताओं और नागरिकों से 24 जून को मुंबई के आज़ाद मैदान में बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को समर्थन देने की अपील की।
पत्रकार परिषद में राज क्षीरसागर, अधिवक्ता टी. एन. कांबळे सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आंदोलन की रूपरेखा और व्यापक भागीदारी की जानकारी साझा की। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। यह आंदोलन अनुसूचित जातियों के भीतर उपवर्गीकरण की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की दिशा में देखा जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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