समुद्पुर। तालुका के लासनपुर स्थित हरिओम बाबा गौशाला आश्रम भक्तों के लिए श्रद्धा और शांति का प्रमुख स्थान है। यहां पिछले 30 वर्षों से हर वर्ष अक्टूबर माह में धार्मिक वातावरण में हरिओम बाबा का पुण्यतिथि महोत्सव आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भी 7 अक्टूबर, बुधवार को पुण्यतिथि महोत्सव का आयोजन किया गया है। ट्रस्ट की ओर से सभी भाविक भक्तों से महाप्रसाद का लाभ लेने का आह्वान किया गया है।

लासनपुर स्थित हरिओम बाबा गौशाला में छोटी-बड़ी करीब 600 गायें हैं, जिनकी संपूर्ण व्यवस्था आश्रम की ओर से की जाती है। करीब 80 वर्ष पूर्व सफेद रंग के घोड़े पर सवार होकर लासनपुर टेकड़ी क्षेत्र में एक बाबा के आने की जानकारी रामचंद्र येलमुले को हुई। इसके बाद यह चर्चा गांव में तेजी से फैल गई। ये बाबा हरिओम बाबा थे। ग्रामीण उनके लिए भोजन लेकर पहुंचे, लेकिन हरिओम बाबा दही, दूध, घी और फल का सेवन करते थे, इसलिए उन्होंने वह भोजन नहीं किया।

इसके बाद हरिओम बाबा ने इसी क्षेत्र में झोपड़ी बनाकर रहना शुरू किया। क्षेत्र के नागरिकों को इसकी जानकारी मिलने के बाद उनके दर्शन के लिए लोगों की भीड़ बढ़ती गई और झोपड़ी का रूप कुटी में बदल गया। हरिओम बाबा ने गंगा नामक गाय से गौशाला का निर्माण किया। कुछ वर्षों बाद यहां पक्की सीमेंट की इमारतों का निर्माण किया गया।

वर्ष 1942 में हरिओम बाबा के यहां रहते हुए महाराज की इच्छा के अनुसार उसी स्थान पर मेघमंडल महादेव मंदिर की स्थापना की गई। इसके 30 वर्ष बाद यहां हनुमानजी, शिवशंकर, नंदी और त्रिशूल की स्थापना की गई। हरिओम बाबा गौशाला आश्रम की ओर से निर्मित मेघमंडल महादेव मंदिर के सामने 30 फुट ऊंचाई की भगवान शंकर की सवारी नंदी की प्रतिमा तथा सामने भोले शंकर और हनुमानजी की 61 फुट ऊंची प्रतिमा यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

नंदी के सामने 15 क्विंटल वजन का एक जीवित त्रिशूल है, जो 20 फुट ऊपर तक ऊंचा है और इतनी ही गहराई तक जमीन में गड़ा हुआ है। मेघमंडल महादेव मंदिर में हर वर्ष महाशिवरात्रि के पर्व पर शिवभक्तों की दर्शन के लिए कतार लगती है। इस दिन तालुका के गांव-गांव से आने वाले लोगों की भोले शंकर के दर्शन की इच्छा लासनपुर महादेव मंदिर में पूरी होती है।

हरिओम बाबा की आयु के संबंध में पुरानी पीढ़ी के लोग भी निश्चित जानकारी नहीं दे सके। जब महाराज यहां आए थे, तब वे जैसे दिखाई देते थे, गांव के बुजुर्ग होने के बाद भी उन्हें उसी रूप में देखते रहे। हरिओम बाबा ने 4 अक्टूबर 1994 को शाम 6:55 बजे देह त्याग दिया। उनके समाधि स्थल के पास भी एक महाकालेश्वर महादेव मंदिर है। इसके सामने अन्नपूर्णा माता का मंदिर, महालक्ष्मी माता का मंदिर, हनुमान मंदिर और निर्माणाधीन दुर्गामाता का मंदिर तथा हवनकुंड सहित विभिन्न दर्शन स्थल इसी आश्रम में स्थित हैं।

यहां सितंबर-अक्टूबर माह में हर वर्ष पुण्यतिथि महोत्सव आयोजित किया जाता है। इस महोत्सव में 50 हजार से अधिक भाविक भक्त प्रसाद का लाभ लेते हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हरिओम बाबा की पुण्यतिथि महोत्सव का आयोजन 7 अक्टूबर को किया गया है। ट्रस्ट की ओर से सभी भाविक भक्तों से महाप्रसाद का लाभ लेने का आह्वान किया गया है।

तीर्थक्षेत्र को ‘क’ दर्जा मिलने के बावजूद सरकारी अनुदान से वंचित

श्री हरिओम बाबा गौशाला आश्रम मंदिर ट्रस्ट लासनपुर संस्था को पिछले 82 वर्षों से आज तक किसी भी प्रकार का अनुदान नहीं मिला है। केंद्र और राज्य शासन ने श्री हरिओम बाबा गौशाला मंदिर को ‘क’ तीर्थक्षेत्र का दर्जा दिया है, लेकिन अनुदान नहीं मिलने से जनता की मांग जोर पकड़ रही है।

यहां सभी धर्म और पंथ के भाविक भक्त श्रद्धाभाव से आते हैं। मंदिर के सभी धार्मिक कार्यों को संचालित करने और यहां की व्यवस्था संभालने के लिए नागपुर, वर्धा तथा अन्य दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले भाविक और उनके परिवार अधिक से अधिक सहयोग करते हैं। मंदिर को भाविकों की ओर से हरसंभव सहायता दी जाती है।

Pratahkal Bureau

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