समृद्धी महामार्ग मामले में बड़ा मोड़, ऐपको कंपनी पर केस दर्ज; मंत्री बावनकुळे की मौजूदगी में होगी उच्चस्तरीय बैठक
समृद्धी महामार्ग निर्माण में कथित अवैध मुरूम उत्खनन मामले में ऐपको कंपनी पर केस दर्ज हुआ। अब उच्चस्तरीय बैठक में जांच और कार्रवाई पर रहेगा फोकस।

तस्वीर में बाईं ओर महाराष्ट्र के विधायक बबनराव लोणीकर का चित्र और दाईं ओर निर्माणाधीन समृद्धी महामार्ग के एक हिस्से का हवाई दृश्य दिखाई दे रहा है, जिसमें मराठी भाषा में समाचार से संबंधित टेक्स्ट ग्राफिक्स लिखे हैं।
जालना–नांदेड समृद्धी महामार्ग के निर्माण के दौरान कथित अवैध मुरूम उत्खनन, सरकारी राजस्व को नुकसान और निर्माण कार्य की गुणवत्ता से जुड़े गंभीर मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लघु पाटबंधारे विभाग के एक अधिकारी की शिकायत पर ठेकेदार ऐपको इन्फ्राटेक कंपनी और संबंधित लोगों के खिलाफ परतूर पुलिस थाने में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
लघु पाटबंधारे विभाग के स्थापत्य अभियांत्रिकी सहायक योगेश राजू वैद्य की शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 0324/2026 दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जांच परतूर पुलिस कर रही है।
शिकायत के अनुसार, नागथास बृहत लघु पाटबंधारे परियोजना क्षेत्र में मुरूम उत्खनन की स्वीकृत सीमा समाप्त होने के बाद भी तालाब की दीवार के पास 15 से 20 फीट गहरे गड्ढे खोदकर बड़े पैमाने पर मुरूम निकाला गया। आरोप है कि इससे तालाब की संरचना को खतरा पैदा हो गया है और भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में कृषि भूमि को नुकसान तथा जनहानि की आशंका भी जताई गई है।
पूर्व मंत्री एवं परतूर विधानसभा क्षेत्र के विधायक बबनराव लोणीकर ने यह मामला विधानसभा में उठाया था। उन्होंने दावा किया कि लगभग 76 हजार ब्रास मुरूम की रॉयल्टी जमा कर वास्तविक रूप से करीब 10 लाख ब्रास मुरूम का अवैध उत्खनन किया गया। इस पूरे प्रकरण से सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उपलब्ध माप के आधार पर दावा किया गया है कि मंठा तालुका में 82 हजार 589 ब्रास तथा परतूर तालुका में 2 लाख 6 हजार 832 ब्रास अतिरिक्त मुरूम का उत्खनन किया गया।
विधायक बबनराव लोणीकर ने समृद्धी महामार्ग के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वीकृत भराव सामग्री के स्थान पर कुछ स्थानों पर काली मिट्टी का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि यदि संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की होती तो कथित अवैध उत्खनन को रोका जा सकता था। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।
मामले का लगातार पीछा करने के बाद राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने अपने कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। बैठक में जालना के जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी तथा संबंधित विभाग के मुख्य अभियंता और अधीक्षक अभियंता उपस्थित रहेंगे।
विधायक बबनराव लोणीकर ने मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक स्तर पर विस्तृत जांच कर दोषी पाए जाने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा सरकार को हुए नुकसान की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।

Pratahkal Bureau
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