महाराष्ट्र के धुले जिले में किशोरियों के मन में उठने वाले सवालों, शारीरिक बदलावों, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं को समझने के लिए ‘सखी संजीवनी अभियान’ के तहत विशेष पहल की गई है। जिलाधिकारी भाग्यश्री विसपुते की संकल्पना से चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य किशोरियों और महिलाओं को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, संतुलित आहार, आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। इसी क्रम में 24 अक्टूबर 2026 को शिरपुर तालुका के लौकी स्थित एकलव्य मॉडर्न मॉडल रेजिडेंसी स्कूल में किशोरियों और महिलाओं के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

बढ़ती उम्र में शरीर में होने वाले बदलाव, मन की उलझनें, पढ़ाई का दबाव, स्वास्थ्य संबंधी सवाल और भविष्य की चिंता किशोरियों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। कई बार उन्हें यह समझ नहीं आता कि अपनी समस्याएं किससे साझा करें और सही मार्गदर्शन कहां से प्राप्त करें। ऐसे में उनकी बात सुनने, उचित जानकारी देने और विश्वास का सहारा उपलब्ध कराने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ‘सखी संजीवनी अभियान’ शुरू किया गया है।

जिलाधिकारी भाग्यश्री विसपुते ने बताया कि किशोरियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल शिक्षा और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उनके मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, सुरक्षा और अपने जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को भी समान महत्व देना आवश्यक है। अभियान के माध्यम से किशोरियों को उचित मार्गदर्शन देने, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें सक्षम बनाने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

किशोरावस्था जीवन का संवेदनशील चरण है। इस दौरान शरीर में होने वाले बदलावों के साथ मन में पैदा होने वाली भावनाओं को समझना भी जरूरी है। सही जानकारी के अभाव, स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं और मानसिक तनाव का असर किशोरियों की दिनचर्या पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय और जिला परिषद, धुले के माध्यम से लौकी स्थित एकलव्य मॉडर्न मॉडल रेजिडेंसी स्कूल में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में किशोरियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बाबासाहेब बेलदार, शिरपुर के उपविभागीय अधिकारी शरद मंडलिक, एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी प्रमोद पाटील, जिला परिषद के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय फडोळ, शिरपुर के तहसीलदार महेंद्र माळी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सचिन बोडके, शिक्षा अधिकारी वैभव बचकर और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की व्याख्याता डॉ. वनमाला पवार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

कार्यशाला के दौरान योग विशेषज्ञ सिद्धी ढगे ने योग सत्र आयोजित किया। डॉ. जगदीश झिरे ने मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। आहार विशेषज्ञ प्रज्ञा धिवरे ने संतुलित आहार और उचित पोषण का महत्व समझाया। डॉ. वनमाला पवार ने ‘निपुण भारत अभियान’ की जानकारी दी, जबकि नरेश बोरसे ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में बताया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल पाटील ने भी मार्गदर्शन किया।

अभियान का उद्देश्य किशोरियों को केवल शैक्षणिक रूप से आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सक्षम और अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना भी है। जिलाधिकारी भाग्यश्री विसपुते ने स्पष्ट किया कि लड़कियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते समय उनके स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को बनाए रखना भी आवश्यक है।

‘सखी संजीवनी अभियान’ की एक प्रमुख विशेषता यह है कि कार्यशाला में प्राप्त जानकारी और प्रशिक्षण को केवल लौकी तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें शामिल महिलाएं आगे जिला स्तर पर मुख्य प्रशिक्षक यानी डिस्ट्रिक्ट मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य करेंगी। वे जिले की अन्य महिलाओं और छात्राओं को प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से संबंधित जागरूकता बढ़ाएंगी।

इस पहल के पीछे यह विचार है कि एक महिला के सक्षम बनने से दूसरी महिलाओं के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाने का रास्ता खुल सकता है। एक सखी में पैदा हुआ आत्मविश्वास दूसरी सखी तक पहुंचे और इसके माध्यम से महिला सशक्तीकरण का व्यापक अभियान खड़ा हो, इसी दिशा में काम किया जा रहा है। जिलाधिकारी भाग्यश्री विसपुते ने बताया कि विभिन्न विभागों की महिला कर्मचारियों के समन्वय से इस कार्य को और व्यापक बनाया जाएगा।

कार्यशाला में शिरपुर तालुका की शिक्षिकाएं, आंगनवाड़ी पर्यवेक्षिकाएं, परिचारिकाएं, आंगनवाड़ी सेविकाएं, कक्षा 6वीं से 12वीं तक की छात्राएं, चिकित्सा, नर्सिंग और फार्मेसी क्षेत्र के विद्यार्थी, स्कूल प्रबंधन समितियों की महिला सदस्य तथा महिला पुलिसकर्मी शामिल हुईं।

‘सखी संजीवनी अभियान’ के माध्यम से किशोरियों और महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी, मानसिक संबल, आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूकता प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी भाग्यश्री विसपुते के अनुसार, महिलाओं के स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसे कार्यक्रमों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। किशोरियों के सवालों को समझना, उन्हें उचित मार्गदर्शन देना और अपनी क्षमताओं पर विश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

Next Story