सद्गुरु बाळूमामा की सोमवती अमावस्या यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण सोमवार को मुदाळतिट्टा, निढोरी और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। राधानगरी, भुदरगड, करवीर और कागल तालुकों के प्रवेशद्वार माने जाने वाले मुदाळतिट्टा में दिनभर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम यात्रियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा और आंध्र प्रदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र श्रीक्षेत्र आदमापूर (तहसील भुदरगड) स्थित सद्गुरु बाळूमामा देव की सोमवती अमावस्या यात्रा का शुभारंभ रविवार से हुआ था। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से राधानगरी-निपाणी तथा गारगोटी-कोल्हापुर जैसे प्रमुख राज्य मार्गों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ता गया और कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

श्रद्धालुओं को समाधि स्थल तक सुरक्षित पहुंचाने और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष यातायात प्रबंधन लागू किया है। मंदिर की ओर जाने वाले वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों की ओर मोड़ा जा रहा है, जबकि अन्य वाहनों के लिए एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा मुदाळतिट्टा, हुतात्मा स्वामी वारके सूतगिरणी, वाघापूर पाटी तथा निढोरी-सोनाळी-बिद्री मार्गों से वैकल्पिक यातायात व्यवस्था भी संचालित की जा रही है।

हालांकि, यातायात को डायवर्ट किए जाने के कारण मुदाळतिट्टा और निढोरी क्षेत्रों में वाहनों का भारी जमावड़ा देखने को मिला। गारगोटी-कोल्हापुर मार्ग पर बिद्री से कुर तक तथा राधानगरी मार्ग पर बोरवडे फाटा तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। वहीं, निपाणी मार्ग पर निढोरी से मुरगूड और कागल मार्ग पर कुरणी तक वाहन धीरे-धीरे आगे बढ़ते नजर आए। कई प्रमुख मार्गों पर यातायात की गति अत्यंत धीमी रही।

पुलिस प्रशासन ने मंदिर परिसर के समीप स्थित उड्डाणपुल और मंदिर क्षेत्र में यातायात को नियंत्रित रखने के लिए विशेष प्रयास किए, जिसके चलते मंदिर के आसपास बड़ी ट्रैफिक अव्यवस्था टल गई। हालांकि, बाहरी मार्गों पर वाहनों का दबाव लगातार बना रहा और कई घंटों तक जाम की स्थिति देखने को मिली।

मंदिर के लगभग दो किलोमीटर के दायरे में वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के कारण श्रद्धालुओं को पैदल चलकर दर्शन के लिए पहुंचना पड़ रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं ने व्यवस्था को सकारात्मक बताते हुए कहा कि थोड़ी दूरी पैदल तय करने के बाद भी उन्हें अपेक्षाकृत शांत और व्यवस्थित तरीके से दर्शन का अवसर मिल रहा है।

सोमवती अमावस्या यात्रा के दौरान उमड़ी विशाल श्रद्धालु भीड़ ने एक बार फिर सद्गुरु बाळूमामा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाया है। हालांकि, इस भारी भीड़ का असर पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिससे प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

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