बामणी में रावे कार्यक्रम के तहत कृषि महाविद्यालय की छात्राएं किसानों को देंगी आधुनिक तकनीक की जानकारी
कोल्हापुर के शासकीय कृषि महाविद्यालय की 6 कृषिकन्याएं अगले 6 माह बामणी गांव में रहकर सेंद्रिय खेती और पीक व्यवस्थापन की जानकारी किसानों तक पहुंचाएंगी।

बामणी (ता. कागल) में रावे कार्यक्रम के तहत पहुंची कोल्हापुर कृषि महाविद्यालय की छात्राएं सरपंच अनुराधा पाटील और ग्राम पदाधिकारियों के साथ ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने।
बामणी (ता. कागल) में राजर्षि छत्रपती शाहू महाराज शासकीय कृषि महाविद्यालय, कोल्हापूर के ग्रामीण कृषि कार्यानुभव एवं औद्योगिक संलग्नता (रावे) कार्यक्रम के तहत कृषिकन्याओं के आगमन से ग्रामीण क्षेत्र में नई उम्मीद और आधुनिक कृषि ज्ञान के प्रसार की शुरुआत हुई है। इस पहल से स्थानीय शेतकऱ्यांना वैज्ञानिक कृषि तकनीकों और शाश्वत खेती के व्यावहारिक ज्ञान का प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
गांव में पहुंची कृषिकन्याओं का ग्रामस्थों की ओर से उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। इस अवसर पर सरपंच अनुराधा पाटील, उपसरपंच सुनीता पाटील तथा राजे बँके के पूर्व अध्यक्ष एवं संचालक एम. पी. पाटील ने कृषिकन्याओं का सत्कार किया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली, जिससे इस शैक्षणिक एवं कृषि-आधारित पहल के प्रति क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना।
इस समूह में ज्ञानेश्वरी निकम, प्रिया कुलकर्णी, सायली पवार, रिद्धी काळे, सायली काशिद और प्रियांका परमणे शामिल हैं। ये कृषिकन्याएं अगले छह महीनों तक बामणी गांव में रहकर शेतकऱ्यांशी प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करेंगी तथा उन्हें कृषि पद्धतियों, पीक व्यवस्थापन, कृषिपूरक व्यवसाय और शाश्वत खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्रदान करेंगी।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि कृषिकन्याएं आधुनिक कृषि तकनीक, पीक संरक्षण उपाय, सेंद्रिय खेती, उत्पादन मूल्यवर्धन तथा कृषि क्षेत्र में उपलब्ध नई संभावनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने का कार्य करेंगी। ग्रामीण जीवनशैली का अध्ययन करते हुए वे स्थानीय कृषि समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के सुझाव भी प्रस्तुत करेंगी।
यह संपूर्ण कार्यक्रम राजर्षि छत्रपती शाहू महाराज शासकीय कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. एस. एस. कांबळे के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। वहीं रावे कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. बी. टी. कोलगणे तथा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एम. आर. खराडे का भी इसमें विशेष योगदान बताया गया है।
यह पहल न केवल शैक्षणिक प्रशिक्षण का हिस्सा है, बल्कि ग्रामीण कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है, जिससे आने वाले समय में किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

Pratahkal Bureau
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