प्रा. रवींद्र शिंदे को ‘पूर्णा-तापी राष्ट्रीय पत्रकार पुरस्कार’, 32 वर्षों की पत्रकारिता का सम्मान
त्र्यंबकेश्वर में चौथे अखिल भारतीय शिवमराठी साहित्य सम्मेलन के दौरान दैनिक ‘तरुण भारत संवाद’ के मुरगूड प्रतिनिधि प्रा. रवींद्र शिंदे को 32 वर्षों की पत्रकारिता के योगदान के लिए ‘पूर्णा-तापी राष्ट्रीय पत्रकार पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

तस्वीर में त्र्यंबकेश्वर में आयोजित सम्मेलन के दौरान प्रा. रवींद्र शिंदे को राष्ट्रीय पत्रकार पुरस्कार से सम्मानित करते हुए मान्यवर नजर आ रहे हैं।
श्रीक्षेत्र त्र्यंबकेश्वर में आयोजित चौथे अखिल भारतीय शिवमराठी साहित्य सम्मेलन में दैनिक ‘तरुण भारत संवाद’ के मुरगूड प्रतिनिधि प्रा. रवींद्र शिंदे को ‘पूर्णा-तापी राष्ट्रीय पत्रकार पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। अभिजात मराठी भाषा गौरव दिवस के अवसर पर उन्हें यह सम्मान पत्रकारिता में 32 वर्षों के योगदान के लिए प्रदान किया गया।
जिला नाशिक के श्रीक्षेत्र त्र्यंबकेश्वर में संतश्रेष्ठ श्री निवृत्तीनाथ महाराज साहित्य नगरी में चौथे अखिल भारतीय शिवमराठी साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। शिवचरण उज्जैनकर फाउंडेशन, मुक्ताईनगर, जिला जळगाव की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में आदिशक्ति संत मुक्ताई व्यासपीठ पर मान्यवरों की उपस्थिति में प्रा. रवींद्र शिंदे को ‘पूर्णा-तापी राष्ट्रीय पत्रकार पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
प्रा. रवींद्र शिंदे पिछले 32 वर्षों से विभिन्न समाचार पत्रों में संवाददाता के रूप में कार्य कर रहे हैं। पत्रकारिता के साथ उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। जय शिवराय एज्युकेशन सोसायटी द्वारा संचालित शिवराय विद्यालय एवं जूनियर कॉलेज में उन्होंने राजनीति विज्ञान और शारीरिक शिक्षा विषय के उपप्राचार्य के रूप में सेवाएं दीं और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
प्रा. शिंदे को इससे पहले ‘कास्ट्राईब कार्यसम्राट पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2025 में मुरगूड शहर पत्रकार संघ के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने पत्रकारों के लिए लोकवर्गणी से करीब पांच लाख रुपये खर्च कर पत्रकार भवन के निर्माण में पहल की थी।
पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मेलन अध्यक्ष सुभाष बागल, स्वामी सोमेश्वरानंद सरस्वती, प्रसिद्ध कृषितज्ज्ञ बुधाजीराव पानसरे, विलास पाटील, एडवोकेट अजितसिंह राणे, नगरसेविका संध्या देवरे, आचार्य शंकर अंदानी, शालिग्राम भिरुड, फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष शिवचरण उज्जैनकर, नंदकुमार राऊत, प्रा. सुमती पवार, डॉ. परशुराम खुडे, डॉ. एस. एन. मराठे, प्रा. रमाकांत जाधव, प्रा. वा. ना. आंधळे, पूर्व नगरसेवक देवरे और वैभव रौंदळ सहित महाराष्ट्र, गोवा तथा कर्नाटक सीमावर्ती क्षेत्र के बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे।
इस सम्मान के माध्यम से प्रा. रवींद्र शिंदे के पत्रकारिता क्षेत्र में 32 वर्षों के योगदान और सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र में उनकी सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
