आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय जयंती पर कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में राष्ट्रीय रसायनशास्त्र दिन उत्साह से मनाया गया
गारगोटी के कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में राष्ट्रीय रसायनशास्त्र दिन पर आधुनिक अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रौद्योगिकी पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।

तस्वीर में गारगोटी महाविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग में आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय रसायनशास्त्र दिन के कार्यक्रम में मार्गदर्शन करते हुए वक्ता और उपस्थित विद्यार्थी नजर आ रहे हैं।
श्री मौनी विद्यापीठ के कर्मवीर हिरे कला, विज्ञान, वाणिज्य एवं शिक्षाशास्त्र महाविद्यालय, गारगोटी में आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय रसायनशास्त्र दिन उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। महाविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में रसायनशास्त्र विषय के प्रति रुचि विकसित करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना तथा आधुनिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी की जानकारी देना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. यू. आर. शिंदे ने की। अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने दैनिक जीवन में रसायनशास्त्र के महत्व, वैज्ञानिक विचारधारा की आवश्यकता और भविष्य की प्रौद्योगिकी के विकास में रसायनशास्त्र की भूमिका पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता तथा रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. एस. एम. पाटील ने रसायनशास्त्र के क्षेत्र में हुए हालिया अनुसंधानों, नोबेल पुरस्कार प्राप्त खोजों, आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा अभियांत्रिकी क्षेत्र में उनके योगदान की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करने और विज्ञान के क्षेत्र में नए योगदान के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय के कार्यों का गौरवपूर्ण उल्लेख किया गया। भारत के महान रसायनशास्त्री, शोधकर्ता, शिक्षक और उद्यमी के रूप में उन्होंने भारतीय रसायनशास्त्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वदेशी रासायनिक उद्योग को बढ़ावा देने के साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों में अनुसंधान की जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का कार्य किया। इसी कारण उन्हें ‘भारतीय रसायनशास्त्र के जनक’ के रूप में जाना जाता है। उनके कार्यों से प्रेरणा लेकर विद्यार्थियों को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करना चाहिए, यह संदेश कार्यक्रम के माध्यम से दिया गया।
कार्यक्रम की योजना और आयोजन श्री एस. एम. वरूटे तथा श्री पी. आर. खराडे ने किया। उन्होंने संचालन, स्वागत और आभार प्रदर्शन की जिम्मेदारी भी सफलतापूर्वक निभाई।
इस अवसर पर आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के प्रमुख डॉ. एस. ए. व्हनाळकर, डॉ. यू. बी. चौगले, डॉ. एस. एम. बागवान, डॉ. सी. आर. पाटील, श्रीमती डी. ए. फडणीस, श्रीमती संचिता कुदळे, महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी तथा रसायनशास्त्र विभाग के स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को रसायनशास्त्र के आधुनिक अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार और प्रौद्योगिकी में इसके बढ़ते महत्व की जानकारी मिली। “रसायनशास्त्र का विचार करें, भविष्य का विचार करें!” इस प्रेरणादायी संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
पत्रकारिता का दृष्टिकोण:
सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।
ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।
