कोल्हापुर के लाल राजवर्धन पाटिल का कमाल, वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ भारतीय दल में चयन
कोल्हापुर के बांगे गांव के युवा मल्ल राजवर्धन पाटिल ने अझरबैजान में होने वाली वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाकर इतिहास रचा है। क्या राजवर्धन अपनी जीत का सिलसिला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बरकरार रख पाएंगे?

लखनऊ में आयोजित ट्रायल में अपनी तकनीकी कुशलता का प्रदर्शन करते हुए कोल्हापुर के पहलवान राजवर्धन पाटिल, जिन्होंने 2026 अज़रबैजान वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है।
खेल जगत में प्रतिभाओं की नर्सरी माने जाने वाले कोल्हापुर के कागल तालुका के बांगे गांव ने एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर अपना गौरव बढ़ाया है। भवानी तालीम के होनहार मल्ल और भविष्य के चमकते सितारे राजवर्धन पाटिल ने लखनौ में आयोजित U-17 वर्ल्ड चैंपियनशिप ट्रायल में अपनी कुश्ती कला का लोहा मनवाते हुए देश का मान बढ़ाया है। इस महत्वपूर्ण ट्रायल में उन्होंने 92 किलोग्राम वजन वर्ग में प्रथम स्थान हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है।
राजवर्धन पाटिल की यह सफलता केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का स्वर्ण अवसर प्रदान किया है। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर वर्ष 2026 में अझरबैजान में आयोजित होने वाली आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए उनका चयन भारतीय कुश्ती टीम में सुनिश्चित हुआ है। यह जीत राजवर्धन की कड़ी मेहनत, अनुशासित जीवनशैली और कुश्ती के प्रति उनके समर्पण का परिणाम है। इस गौरवपूर्ण यात्रा में उन्हें भवानी तालीम के प्रशिक्षकों का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। पै. रवींद्र पाटील, पै. भाऊसो सावंत, पै. तुकाराम चोपडे, पै. आकाश नलवडे, पै. वैभव तेली और पै. संतोष हिरुगडे जैसे कुशल मार्गदर्शकों के सानिध्य में राजवर्धन ने अपनी तकनीकी बारीकियों को निखारा है।
राजवर्धन के पिता पै. रवींद्र पाटील स्वयं बिद्री चीनी मिल के संचालक और उपमहापौर केसरी रह चुके हैं, जिन्होंने अपने पुत्र के खेल के प्रति सदैव उत्साहवर्धन किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से बांगे गांव सहित पूरे कागल तालुका में हर्ष का माहौल है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि राजवर्धन की यह सफलता स्थानीय युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। अझरबैजान की कुश्ती मैट पर जब राजवर्धन भारत का प्रतिनिधित्व करने उतरेंगे, तब पूरे देश की निगाहें उन पर टिकी होंगी। उनकी यह उपलब्धि न केवल कोल्हापुर की कुश्ती परंपरा को वैश्विक मंच पर ले जाएगी, बल्कि भारतीय कुश्ती के भविष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

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