राजुरा: महाराष्ट्र की राजनीति के गढ़ राजुरा में कांग्रेस के भीतर एक बड़ा सियासी भूकंप आया है। पूर्व विधायक सुभाष धोटे के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुनील देशपांडे ने पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है। लंबे समय से निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाने वाले देशपांडे को हालिया नियुक्तियों में दरकिनार किए जाने के बाद उनकी नाराजगी अब इस्तीफों के रूप में सामने आई है, जिससे स्थानीय कांग्रेस खेमे में भारी हड़कंप मच गया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तब और तेज हो गई जब सुनील देशपांडे ने भाजपा विधायक देवराव भोंगले से मुलाकात की। इस मुलाकात को देशपांडे के भविष्य के कड़े फैसलों का संकेत माना जा रहा है। सुनील देशपांडे की नाराजगी का मुख्य कारण नगर परिषद चुनाव में मिली बड़ी जीत के बावजूद उन्हें पद से वंचित रखना बताया जा रहा है। हाल ही में हुए चुनाव के दौरान संगठन के कद्दावर नेता वामनराव चटप और पूर्व विधायक सुभाष धोटे के बीच दूरियां कम करने और उन्हें एक मंच पर लाने में देशपांडे ने सूत्रधार की भूमिका निभाई थी। इन दोनों दिग्गज नेताओं के बीच हुए तालमेल का ही परिणाम था कि अघाड़ी गठबंधन ने नगराध्यक्ष समेत 17 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

प्रचार के दौरान देशपांडे ने कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत की, लेकिन जब पुरस्कार की बारी आई, तो उन्हें नगराध्यक्ष (खुला प्रवर्ग) और स्वीकृत सदस्य के चयन के दौरान कथित रूप से 'धोखा' दिया गया। देशपांडे का आरोप है कि पार्टी और नेताओं के लिए दिन-रात एक करने और ईमानदारी बरतने के बावजूद उन्हें केवल झूठे आश्वासन दिए गए। इसी उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने सुभाष धोटे की अध्यक्षता वाली 'राजुरा नागरी सहकारी पतसंस्था' के संचालक पद से अपना इस्तीफा दे दिया है और साथ ही 'इंदिरा जिनिंग' से भी बाहर निकल गए हैं।

देशपांडे के इस आक्रामक रुख ने कार्यकर्ताओं को सकते में डाल दिया है। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा है कि पार्टी के संदर्भ में वह अंतिम और कठोर निर्णय आगामी 18 जनवरी 2026 को लेंगे। राजुरा की राजनीति में देशपांडे का कद इतना बड़ा है कि उनके जाने से कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को बड़ी क्षति पहुंच सकती है। अब सबकी नजरें 18 जनवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि क्या राजुरा का यह कद्दावर नेता कांग्रेस का दामन छोड़ किसी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करेगा।

Manoj Gore (Chandrapur)

Manoj Gore (Chandrapur)

नाम: मनोज रामकृष्ण गोरे

वर्तमान पद: रिपोर्टर (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: चंद्रपुर जिला (महाराष्ट्र)

बीट (मुख्य विषय): प्रशासन

परिचय

मनोज रामकृष्ण गोरे महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र के रिपोर्टर हैं। वह मुख्य रूप से चंद्रपुर जिले के प्रशासनिक विभागों की कार्यप्रणाली, सरकारी योजनाओं, जनसुनवाई, विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

मनोज रामकृष्ण गोरे को मीडिया क्षेत्र में ग्राउंड रिपोर्टिंग और समाचार संकलन का 5 वर्ष का अनुभव है। वह पिछले पांच सालों से चंद्रपुर जिले के स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों को नियमित रूप से रिपोर्ट कर रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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