आंदोलन की पृष्ठभूमि और मुख्य मांग

“जय जवान, जय किसान” के नारे के साथ जमीन के कानूनी मालिकाना हक के लिए किसान अब सीधे लड़ाई के मैदान में उतर रहे हैं। राजुरा विधानसभा क्षेत्र के गोंडपिपरी, कोरपना, राजुरा और जिवती तहसीलों के किसानों को उनकी जोत वाली जमीन के मालिकाना हक के पट्टे तुरंत प्रदान किए जाएं, इस प्रमुख मांग के लिए कल (दिनांक 20) सुबह 11 बजे जन किसान मोर्चा निकाला जाएगा।

मोर्चे का विवरण और मार्ग

  • प्रस्थान: मोर्चे की शुरुआत राजुरा के नाका नंबर 3 से होगी।
  • गंतव्य: यह मोर्चा तहसील कार्यालय पर जाकर टकराएगा।
  • समय: दोपहर 3 बजे तक चलने वाले इस आंदोलन में हजारों किसानों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
  • नेतृत्व: मोर्चे का नेतृत्व जिला अध्यक्ष प्रियाताई खाडे करेंगी।

किसानों की समस्याएं और प्रशासन पर सवाल

राजुरा विधानसभा क्षेत्र में कई किसान पीढ़ियों से जमीन जोत रहे हैं, लेकिन राजस्व अभिलेखों में विभिन्न कारणों से उन्हें अभी तक मालिकाना हक के पट्टे नहीं मिले हैं। इसके परिणामस्वरूप, किसानों को कर्ज प्राप्ति, फसल बीमा, सरकारी अनुदान और योजनाओं का लाभ लेने में बाधाएं आ रही हैं। जमीन जोतने वाला किसान और कागजों पर मालिक अलग - इस विसंगति से ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ गया है। कायदे से पात्र होने के बावजूद मालिकाना हक की मंजूरी में हो रहा विलंब केवल प्रशासनिक ढिलाई का परिणाम है या अन्य कोई हितसंबंध कार्यरत हैं, ऐसा सवाल भी किसान संगठनों द्वारा उठाया जा रहा है।

प्रशासन को चेतावनी और मांगें

मोर्चे के माध्यम से तहसील प्रशासन को लिखित निवेदन देकर तुरंत सभी पात्र किसानों का सत्यापन कर मालिकाना हक के पट्टे वितरित करने की मांग की जाएगी। आंदोलनकारियों द्वारा सीधा प्रश्न उठाया जा रहा है कि: “जमीन हमारी, हक हमारा; तो फिर देरी किसलिए?”

आर्थिक स्थिरता और भविष्य का सवाल

किसान प्रतिनिधियों के अनुसार, जमीन के मालिकाना हक के बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल नहीं मिल सकता। यदि किसान को कानूनी स्वामित्व मिलता है, तो वह बैंकिंग लेनदेन, निवेश और स्थायी कृषि पद्धतियों को अपनाने में सक्षम होगा; अन्यथा वह हमेशा अनिश्चितता की छाया में रहेगा।

नियोजन और व्यवस्था

आयोजकों ने मोर्चे को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया है। सभी सहभागी किसानों से समय पर उपस्थित रहने की अपील की गई है। मोर्चा प्रतिभागियों के लिए राजुरा बस स्टॉप के सामने बुद्धभूमि में भोजन की व्यवस्था की गई है।

निष्कर्ष

इस पृष्ठभूमि में तहसील प्रशासन की भूमिका निर्णायक होगी। मालिकाना हक के मुद्दे पर ठोस निर्णय लेकर किसानों को न्याय दिया जाएगा या केवल आश्वासनों की बारिश की जाएगी, इस पर पूरी तहसील की नजरें टिकी हैं। राजुरा का यह जन किसान मोर्चा केवल एक दिन का आंदोलन नहीं है; यह ग्रामीण क्षेत्रों में संचित असंतोष की सार्वजनिक अभिव्यक्ति है। जमीन का मुद्दा केवल राजस्व कागजी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह किसान के सम्मान, अस्तित्व और भविष्य से जुड़ा है। क्या कल का दिन राजुरा तहसील के किसानों के संघर्ष का नया अध्याय बनेगा, इसका उत्तर अब प्रशासन की कार्रवाई से ही मिलेगा।


Manoj Gore (Chandrapur)

Manoj Gore (Chandrapur)

नाम: मनोज रामकृष्ण गोरे

वर्तमान पद: रिपोर्टर (प्रातःकाल)

कार्यक्षेत्र: चंद्रपुर जिला (महाराष्ट्र)

बीट (मुख्य विषय): प्रशासन

परिचय

मनोज रामकृष्ण गोरे महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र के रिपोर्टर हैं। वह मुख्य रूप से चंद्रपुर जिले के प्रशासनिक विभागों की कार्यप्रणाली, सरकारी योजनाओं, जनसुनवाई, विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव 

मनोज रामकृष्ण गोरे को मीडिया क्षेत्र में ग्राउंड रिपोर्टिंग और समाचार संकलन का 5 वर्ष का अनुभव है। वह पिछले पांच सालों से चंद्रपुर जिले के स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों को नियमित रूप से रिपोर्ट कर रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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