ऊस को 5 हजार रुपये प्रति टन भाव दें, 15 अक्टूबर को मिलें शुरू करने का विरोध
राजू शेट्टी ने गन्ने का भाव 5 हजार रुपये प्रति टन करने और 15 अक्टूबर की मिल शुरुआत पर 500 रुपये अनुदान की मांग की।

तस्वीर में पूर्व सांसद राजू शेट्टी अन्य लोगों के साथ लातूर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते नजर आ रहे हैं।
लातूर में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने गन्ने के भाव को लेकर सरकार के सामने 5 हजार रुपये प्रति टन का भाव देने की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों से गन्ने के दाम में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है, जबकि दूसरी ओर चीनी के दाम बढ़े हैं और इथेनॉल उत्पादन को भी बड़ी गति मिली है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक मिलना जरूरी है। शेट्टी ने इथेनॉल की खरीद कीमत में 12 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 70 रुपये करने की भी मांग की।
शेट्टी सोमवार को लातूर जिले के दौरे पर थे। लातूर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने गन्ने के भाव, चीनी मिलों के पेराई सत्र और राज्य में सूखे की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने मांजरा परिवार के प्रमुख, पूर्व मंत्री और सहकार महर्षि दिलीपराव देशमुख से भी मुलाकात की।
15 अक्टूबर को चीनी मिलें शुरू करने के सरकार के फैसले का स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने कड़ा विरोध किया है। शेट्टी ने कहा कि यदि 15 अक्टूबर को मिलें शुरू होती हैं तो पेराई के लिए केवल 11 महीने का तैयार गन्ना उपलब्ध होगा। इससे गन्ने की रिकवरी साढ़े सात से आठ प्रतिशत तक ही रहने की संभावना है। इसका नुकसान किसानों और चीनी मिल संचालकों दोनों को उठाना पड़ेगा।
शेट्टी ने कहा कि यदि सरकार को 15 अक्टूबर को ही चीनी मिलें शुरू करनी हैं तो किसानों को प्रति टन 500 रुपये का प्रत्यक्ष अनुदान दिया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर 29 सितंबर को केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रल्हाद जोशी के हुबली स्थित आवास के सामने महाराष्ट्र और कर्नाटक के करीब डेढ़ लाख किसान आंदोलन करेंगे, ऐसा उन्होंने चेतावनी दी।
‘हरी-भरी फसल, लेकिन किसानों के हाथ में फलियां नहीं!’
शेट्टी ने कहा कि राज्य में लातूर समेत हर जगह गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हो गई है, लेकिन सरकार निरीक्षण और रिपोर्ट की प्रक्रिया में उलझी हुई है। खरीफ की फसलें ऊपर से हरी-भरी दिखाई दे रही हैं, लेकिन कई जगह फसलों में फलियां ही नहीं लगी हैं। बुवाई, बीज, खाद और दवाओं के छिड़काव पर किसानों ने बड़ी राशि खर्च की, लेकिन फसलें हाथ से निकल जाने के कारण किसानों के सामने फिर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
रबी सीजन के लिए खेत तैयार करने में भी किसानों को नए सिरे से खर्च करना पड़ेगा। इसलिए सरकार को 5 अक्टूबर तक इंतजार किए बिना तत्काल सूखा घोषित कर किसानों को सहायता देनी चाहिए, यह मांग शेट्टी ने की।
शेट्टी ने कहा कि कर्नाटक ने तत्काल सूखा घोषित कर उपाय शुरू कर दिए हैं, जबकि तमिलनाडु में भी सूखा घोषित किया गया है। महाराष्ट्र में सरकार निरीक्षण और रिपोर्ट के बीच ही उलझी हुई है। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “किसानों की आंखों में आंसू हैं और सरकार रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।”
गन्ने के भाव, चीनी मिलों के पेराई सत्र और सूखे की स्थिति को लेकर राजू शेट्टी की मांगों के बीच 29 सितंबर के प्रस्तावित किसान आंदोलन पर भी नजर रहेगी।

Limbraj Panhalkar (Latur)
नाम: लिंबराज शिवराम पन्हाळकर
वर्तमान पद: जिला रिपोर्टर (लातूर)
कार्यक्षेत्र: लातूर (महाराष्ट्र)
बीट : क्राइम (अपराध) एवं सभी प्रकार की रिपोर्टिंग
अनुभव: 20 साल
परिचय
लिंबराज शिवराम पन्हाळकर महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक वरिष्ठ और अनुभवी समाचार संवाददाता हैं। वह वर्तमान में लातूर जिला रिपोर्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लिंबराज पन्हाळकर क्षेत्र की सभी प्रकार की प्रशासनिक और स्थानीय खबरों को कवर करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से क्राइम (अपराध) से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
लिंबराज पन्हाळकर को मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और गहरा अनुभव है। दो दशकों से लातूर क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय मुद्दों, कानून-व्यवस्था और क्षेत्रीय गतिविधियों पर उनकी मजबूत पकड़ है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
बी.ए. जर्नलिज्म (B.A. in Journalism): उन्होंने पत्रकारिता विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की है।
