चंद्रपुर जिले के कोरपना तालुका में अगस्त और सितंबर के महीनों में हुई बेहद कम बारिश ने पूरे कृषि क्षेत्र को संकट की कगार पर ला खड़ा किया है। खरीफ सीजन के अंत तक बारिश की कमी इतनी गंभीर हो गई कि सोयाबीन, अरहर, चना, धान, मक्का और सब्जियों जैसी प्रमुख फसलें सूखने लगीं। कई जगहों पर फसलें नमी के अभाव में मुरझा गईं और रेतीली होकर पूरी तरह नष्ट हो गईं, जिससे किसानों में गहरी निराशा फैल गई है।

तालुका के किसानों ने इस सीजन में जुताई, बीज, ड्रिप सिंचाई और खाद पर भारी निवेश किया था, लेकिन मौसम की बेरुखी ने उनकी पूरी पूंजी पर पानी फेर दिया। दिवाली करीब होने के बावजूद किसानों के पास आमदनी की कोई उम्मीद नहीं बची है। कई किसानों ने कर्ज लेकर बुवाई की थी, पर अब उन्हें डर है कि पूरी लागत डूब जाएगी और आर्थिक संकट गहरा जाएगा।

ऐसे हालात में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के तालुका प्रमुख डॉ. प्रकाश नीलकंठराव खनके ने तहसीलदार कार्यालय में प्रतिनिधित्व देकर तुरंत पंचनामा शुरू करने और प्रभावित किसानों को मुआवज़ा देने की मांग की। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से तालुका में बारिश 65 मिमी से भी कम दर्ज की गई है, जिससे फसलों की वृद्धि रुक गई है। पौधों के तने विकसित नहीं हो रहे, पत्ते पीले पड़ रहे और उपज की संभावना तेजी से घट रही है।

तहसीलदार ने स्वीकार किया कि सरकार से आधिकारिक पत्र न मिलने के कारण मुआवज़ा वितरण में देरी हो रही है, लेकिन पत्र मिलते ही सहायता तुरंत जारी की जाएगी। इसी बीच कोरपना, नांदा और नारंदा मंडल के किसानों को अभी तक सब्सिडी भी नहीं मिली है, जिससे उनका संकट और बढ़ गया है।

सूखे ने पानी की उपलब्धता पर भी प्रभाव डाला है। कई गांवों में कुएं और बोरवेल सूखने की कगार पर हैं, जिससे पेयजल और पशुओं के चारे की समस्या गंभीर बनती जा रही है। शिवसेना ने मांग की है कि तत्काल पानी और चारे की व्यवस्था की जाए, ताकि पशुधन को बचाया जा सके।

इस प्रतिनिधित्व की प्रतियां विधायक देवराव भोंगले, चंद्रपुर जिला कलेक्टर और राजुरा के उपविभागीय अधिकारी को भेजी गई हैं। डॉ. खनके और सुरेशदादा खोबरकर ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में किसानों को मुआवज़ा नहीं मिला, तो वे भूख हड़ताल पर उतरेंगे। इस दौरान कई पदाधिकारी और स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कोरपना तालुका में बारिश की खराब स्थिति अगर इसी तरह बनी रही तो खरीफ सीजन पूरी तरह से विफल होने का खतरा बढ़ गया है, जो हजारों किसानों की आजीविका पर गहरा असर डाल सकता है।

Pratahkal Newsroom

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