कोरपना क्षेत्र में महावितरण के बढ़ते कामकाज और दूरदराज के गांवों तक उसकी सेवाओं के विस्तार ने अब स्थानीय नागरिकों की परेशानियों को भी उजागर कर दिया है। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए गडचांदूर महावितरण सब-डिवीजन को विभाजित कर उसका एक नया उप-विभाग कोरपना में स्थापित किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष ओम पवार ने विधायक देवराव भोंगले को ज्ञापन सौंपा है।

गडचांदूर महावितरण सब-डिवीजन के अधिकार क्षेत्र में वर्तमान में पूरा कोरपना तालुका शामिल है, साथ ही राजुरा और जिवती तालुका के कई गांव भी इसी के अधीन आते हैं। कुल मिलाकर इस सब-डिवीजन के दायरे में 140 से अधिक गांव और लगभग 36 हजार से ज्यादा उपभोक्ता आते हैं। इतना बड़ा भौगोलिक विस्तार होने के कारण उपभोक्ताओं को छोटी-छोटी बिजली संबंधी प्रक्रियाओं, शिकायतों और कार्यों के लिए गडचांदूर तक बार-बार जाना पड़ता है।

कोरपना तालुका के तेलंगाना सीमा से जुड़े अंतिम गांवों से गडचांदूर की दूरी 42 किलोमीटर से भी अधिक है, जिससे आम नागरिकों को समय, पैसे और परिवहन की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दूरी न केवल असुविधाजनक है, बल्कि आवश्यक बिजली सेवाओं के लिए समय पर पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।

ज्ञापन में यह मांग की गई है कि कोरपना में नया डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, महावितरण सब-डिवीजन स्थापित किया जाए। इससे न केवल कोरपना तालुका के उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि जिवती तालुका के वंसाडी, पारडी, कोडाशी बुज, नारंडा और धनकदेवी जैसे क्षेत्रों के ग्रामीणों को भी सुविधाजनक बिजली सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। स्थानीय नेतृत्व ने इसे जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है तथा उम्मीद जताई है कि मांग पर शीघ्र उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह मुद्दा क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लाता है, जिसकी दिशा में अब राजनीतिक स्तर पर भी कदम बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

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