पुणे जिले के मोशी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना में तीन मंजिला इमारत गिरने के मामले में पुलिस ने निजी ऊर्जा कंपनी के दो अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस हादसे में पिछले सप्ताह नौ लोगों की मौत हो गई थी। मामला 8 जुलाई को हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित कचरा-से-ऊर्जा संयंत्र की प्रशासनिक इमारत पर भारी मात्रा में जमा पुराना कचरा खिसकने के बाद इमारत ढह गई थी। यह संयंत्र पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) के लिए संचालित किया जा रहा था।

पुलिस जांच में आरोप लगाया गया है कि लगातार हो रही भारी बारिश और इमारत के पास मौजूद बड़े पैमाने पर पुराने कचरे के ढेर के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए थे।

कंपनी के दो अधिकारियों पर मामला दर्ज

पुलिस के अनुसार, एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड अशोक गुप्ता और प्लांट के सेफ्टी ऑफिसर विजय सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दोनों अधिकारियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (हत्या न होने वाला आपराधिक मानव वध), धारा 125 (मानव जीवन को खतरे में डालने वाला लापरवाह या गैर-जिम्मेदाराना कृत्य) और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।

FIR पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम के अधिकारियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा उपाय लागू नहीं करने का FIR में आरोप

शिकायत के अनुसार, कंपनी को इस बात की जानकारी थी कि भारी बारिश के कारण संयंत्र के पास स्थित सैनिटरी लैंडफिल (SLF) की स्थिरता प्रभावित हो सकती है, इसके बावजूद आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए।

FIR में कहा गया है कि मौसम की स्थिति से लैंडफिल साइट पर खतरे की आशंका बढ़ने के बावजूद किसी तरह की रोकथाम संबंधी कार्रवाई नहीं की गई।

FIR में दर्ज है, "कोई सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए जाने के कारण 8 जुलाई को SLF (पुराने कचरे का ढेर) का एक हिस्सा ढह गया, जो तीन मंजिला इमारत पर गिरा और इसमें नौ लोगों की मौत हो गई।"

हादसे के दौरान कचरे का विशाल ढेर वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की प्रशासनिक इमारत पर गिर गया था, जिससे इमारत ढह गई और कई लोग अंदर फंस गए थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया ऑक्यूपेंसी से जुड़ा मुद्दा

सोमवार को पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंपनी के अनुरोध पर इमारत के केवल ग्राउंड फ्लोर के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया गया था।

अधिकारी अब यह जांच कर रहे हैं कि क्या ऊपरी मंजिलों का उपयोग आवश्यक मंजूरी के बिना किया जा रहा था और क्या इस वजह से हादसे की गंभीरता बढ़ी।

इसके अलावा निर्माण, सुरक्षा और संचालन से जुड़े नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है।

महाराष्ट्र सरकार ने स्वतंत्र जांच के आदेश दिए

हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इमारत गिरने की परिस्थितियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय तकनीकी जांच समिति का गठन किया।

PCMC आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने कहा कि लगातार भारी बारिश और इमारत के पास मौजूद पुराने कचरे के बड़े ढेर के बावजूद कंपनी ने प्रारंभिक रूप से पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता दिखाई है।

उन्होंने बताया कि शहरी विकास विभाग ने निष्पक्ष और व्यापक तकनीकी जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय सुझाने के निर्देश दिए हैं।

विशेषज्ञ समिति करेगी हादसे के कारणों की जांच

जांच समिति की अध्यक्षता संभागीय आयुक्त शीतल तेली-उगले करेंगी। समिति के अन्य सदस्यों में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग के डी. एन. सिंह और पर्यावरण एवं ठोस कचरा प्रबंधन विशेषज्ञ अनिल कुमार दीक्षित शामिल हैं।

सहायक आयुक्त (आपदा प्रबंधन) समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

सूर्यवंशी ने कहा, "सरकार ने घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र समिति का गठन किया है।"

अब जांच समिति हादसे के तकनीकी कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और जिम्मेदारियों से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिससे मोशी कचरा संयंत्र हादसे से जुड़े तथ्यों को सामने लाया जा सके।

Pratahkal Newsroom

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