भारत सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत राजा राममोहन रॉय ग्रंथालय प्रतिष्ठान, कोलकाता द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए समान निधि (Matching Scheme) और असमान निधि (Non-Matching Scheme) योजनाओं के माध्यम से शासनमान्य सार्वजनिक पुस्तकालयों के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न आर्थिक सहायता योजनाएं लागू की गई हैं। इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए राज्य के शासनमान्य सार्वजनिक पुस्तकालयों को निर्धारित प्रारूप में अपने प्रस्ताव 21 अगस्त 2026 तक संबंधित जिला ग्रंथालय अधिकारी कार्यालय में जमा करने होंगे। यह जानकारी जिला ग्रंथालय अधिकारी अर्पणा वाईकर ने दी है।

अर्पणा वाईकर ने बताया कि समान निधि योजना के अंतर्गत पुस्तकालय भवन के निर्माण एवं विस्तार कार्यों के लिए 25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, असमान निधि योजना के तहत पुस्तक खरीद, फर्नीचर, भवन निर्माण एवं विस्तार, ‘ज्ञान कोपरा’ और ‘बाल कोपरा’ की स्थापना, पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण, महोत्सवी वर्ष मनाने के लिए विशेष अनुदान तथा राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार, कार्यशाला, प्रशिक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

उन्होंने बताया कि योजना के नियम, शर्तें तथा आवेदन का निर्धारित प्रारूप www.rrrlf.gov.in संकेतस्थल पर उपलब्ध है। इच्छुक शासनमान्य सार्वजनिक पुस्तकालयों को आवश्यक दस्तावेजों सहित अपने प्रस्ताव अंग्रेजी या हिंदी भाषा में चार प्रतियों के साथ संबंधित जिला ग्रंथालय अधिकारी कार्यालय में जमा करने होंगे। इसके साथ ही राजा राममोहन रॉय ग्रंथालय प्रतिष्ठान की ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से भी प्रस्ताव प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

जिला ग्रंथालय अधिकारी अर्पणा वाईकर ने इच्छुक पुस्तकालयों से समयसीमा का पालन करते हुए 21 अगस्त 2026 तक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आग्रह किया है। साथ ही, योजनाओं से संबंधित अधिक जानकारी के लिए संबंधित जिला ग्रंथालय अधिकारी कार्यालय से संपर्क करने की अपील भी की गई है।

Vijay Morbale, Kolhapur

Vijay Morbale, Kolhapur

पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)

शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा

परिचय:

विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।

कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:

विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।

पत्रकारिता का दृष्टिकोण:

सकारात्मक और समाजोपयोगी पत्रकारिता में गहरा विश्वास रखने वाले विजय हमेशा उन खबरों को प्राथमिकता देते हैं जो समाज में बदलाव ला सकें। हाल ही में जून 2026 में, एक सेवानिवृत्ति समारोह में हार-फूलों की जगह अनाज इकट्ठा कर जरूरतमंदों को बांटने की एक अनूठी सामाजिक पहल को उन्होंने प्रमुखता से कवर किया था, जिसे काफी सराहना मिली।

ग्रामीण भारत की आवाज और स्थानीय विकास की खबरों को डिजिटल माध्यमों पर मजबूती से रखने के लिए विजय मोरबाळे लगातार प्रयासरत हैं।

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