लातूर में सियासी 'भूकंप': कामखेड़ा में दो सगी देवरानी-जेठानी के बीच छिड़ी महाजंग, टूटेगा रिश्तों का तिलिस्म!
लातूर जिला परिषद चुनाव में कामखेड़ा सीट पर छिड़ा भीषण राजनीतिक संग्राम! दो सगी देवरानी-जेठानी, सौ. सरिता शंकर भिसे (भाजपा) और सौ. आशा शिवाजी भिसे (कांग्रेस), एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरीं। पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के सचिव रहे शंकर भिसे के परिवार में मचे इस सियासी घमासान ने पूरे महाराष्ट्र का ध्यान खींचा है। जानिए रिश्तों और राजनीति की यह अनूठी जंग।

लातूर। महाराष्ट्र की सियासत में लातूर हमेशा से ही सत्ता के संघर्ष का केंद्र रहा है, लेकिन इस बार लातूर जिला परिषद के चुनावी रण में एक ऐसी पटकथा लिखी जा रही है जो रिश्तों की मर्यादा और राजनीति की महत्वाकांक्षा के बीच के द्वंद्व को सरेआम कर रही है। रेणापूर तहसील के कामखेड़ा निर्वाचन क्षेत्र में राजनीति ने घर के भीतर ही दरार पैदा कर दी है, जहाँ दो सगी देवरानी-जेठानी एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोक रही हैं। जिला परिषद अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन भिसे परिवार की इस आपसी लड़ाई ने पूरे जिले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
इस हाई-प्रोफाइल चुनावी मुकाबले की शुरुआत तब हुई जब भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के तत्कालीन निजी सचिव शंकर भिसे की पत्नी सौ. सरिता शंकर भिसे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया। भोकरंचा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान भाजपा ने सरिता भिसे के नाम पर मुहर लगाकर अपने इरादे साफ कर दिए। गौरतलब है कि शंकर भिसे ने हाल ही में भाजपा का दामन थामा है, जबकि उनके भाई और पूर्व विधायक एडवोकेट त्र्यंबक भिसे भी पहले से ही भाजपा में सक्रिय हैं। भाजपा इस सीट को जीतकर अपनी साख मजबूत करने की कोशिश में है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी बिसात बिछा दी है। कांग्रेस ने इसी परिवार की दूसरी बहू सौ. आशा शिवाजी भिसे को कामखेड़ा निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने का निर्देश दिया है। आशा भिसे पिछले तीन से चार दशकों से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में बेहद सक्रिय रही हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) में लंबे समय तक कार्य करने वाली आशा भिसे को सांसद सुप्रिया सुळे का बेहद करीबी और भरोसेमंद कार्यकर्ता माना जाता है। कांग्रेस ने उनके अनुभव और पुरानी राजनीतिक पकड़ पर दांव लगाकर इस मुकाबले को सीधे तौर पर 'घर के भीतर की जंग' बना दिया है।
अब कामखेड़ा के चुनावी दंगल में भाजपा की सरिता भिसे और कांग्रेस की आशा भिसे के बीच होने वाला यह मुकाबला महज एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। सगी देवरानी और जेठानी का इस तरह आमने-सामने होना मतदाताओं के बीच भी चर्चा का विषय है। एक तरफ भाजपा का नया कैडर और सत्ता की लहर है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस का पुराना अनुभव और दशकों की सामाजिक सेवा। जैसे-जैसे २१ जनवरी की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया के साथ जिले का राजनीतिक पारा भी चढ़ता जा रहा है। लातूर जिला परिषद की सत्ता पर काबिज होने के लिए दोनों पार्टियां साम, दाम, दंड, भेद का प्रयोग कर रही हैं, जिसने इस अनोखी जंग को महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र बिंदु बना दिया है।

Pratahkal Bureau
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