पिता की हत्यारिन बनी 'पुलिस वाली' बेटी: प्यार में रोड़ा बने हेड कांस्टेबल पिता को पिलाया जहर वाला मिल्कशेक
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में दिल दहला देने वाला खुलासा: पुलिसकर्मी बेटी आर्या बल्लावार ने प्रेमी के साथ मिलकर की अपने हेड कॉन्स्टेबल पिता की जहर देकर हत्या। तीन साल पहले 'आकस्मिक मौत' मानकर बंद किए गए इस केस का सच अब सामने आया है। रिश्तों के कत्ल और खाकी पर लगे इस दाग की पूरी दास्तां पढ़ें, कैसे एक मिल्कशेक बना मौत का कारण।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों के अटूट विश्वास को तार-तार कर दिया है। यह कहानी किसी डार्क थ्रिलर फिल्म जैसी प्रतीत होती है, लेकिन इसके पीछे छिपी कड़वी हकीकत ने पुलिस महकमे समेत पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है। जिस बेटी के कंधों पर समाज की रक्षा और पिता के सम्मान की जिम्मेदारी थी, वही अपने पिता के रक्त की प्यासी बन बैठी। भद्रावती क्षेत्र में तीन वर्ष पूर्व हुई एक ‘आकस्मिक मृत्यु’ का जो सच अब निकलकर सामने आया है, उसने कानून के रखवालों के भी होश उड़ा दिए हैं। यह कोई प्राकृतिक मौत नहीं, बल्कि बेहद ठंडे दिमाग से अंजाम दिया गया एक जघन्य हत्याकांड था।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की मुख्य सूत्रधार मृतक की अपनी बेटी आर्या बल्लावार और उसका प्रेमी आशीष महेश शेडमाके हैं। विडंबना की पराकाष्ठा देखिए कि मृतक जयंत बल्लावार पुलिस विभाग में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे और उनकी पुत्री आर्या भी उसी खाकी वर्दी का हिस्सा थी, जिसका धर्म न्याय करना है। आर्या और आशीष के प्रेम संबंधों की जानकारी जब जयंत बल्लावार को हुई, तो उन्होंने एक अनुशासित पिता की भांति इसका पुरजोर विरोध किया। पिता का यही अनुशासन आर्या को अपनी स्वच्छंदता में बाधा लगने लगा। घर के भीतर उपजे इसी कलह ने आर्या के मन में प्रतिशोध का ऐसा विष घोला कि उसने अपने जन्मदाता को ही रास्ते से हटाने का क्रूर निर्णय ले लिया।
हत्या की इस साजिश को बड़ी ही शातिराना बारीकी से बुना गया था। साजिश के क्रियान्वयन के लिए आशीष ने अपने एक नाबालिग रिश्तेदार और चैतन्य उर्फ मोंटी सचिन गेडाम की सहायता से घातक जहर का प्रबंध किया। 25 अप्रैल 2023 के दिन, ममता और कर्तव्य के तमाम बंधनों को दरकिनार करते हुए आर्या ने अपने पिता को मिल्कशेक में जहर मिलाकर पिला दिया। जहर ने अपना काम धीरे-धीरे शुरू किया। जयंत बल्लावार नियत समय पर अपनी ड्यूटी पर गए, किंतु कुछ ही घंटों के भीतर उनकी स्थिति बिगड़ने लगी। उन्हें तत्काल चिकित्सालय ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उस समय आर्या के पुलिस विभाग में होने और किसी भी संदेह के अभाव में पुलिस ने इसे 'आकस्मिक मृत्यु' मानकर फाइल बंद कर दी थी।
लगभग तीन वर्षों तक यह काला राज दफन रहा, क्योंकि आर्या ने अपनी विभागीय जानकारी का लाभ उठाते हुए जांच की दिशा को बड़ी चतुराई से भटकाए रखा। किंतु नियति का चक्र अंततः घूमकर वहीं आया। जिस प्रेमी के लिए आर्या ने अपने पिता की बलि दी थी, उसी आशीष ने आपसी विवाद या आत्मग्लानि के कारण इस राज पर से पर्दा उठा दिया। आशीष के इकबालिया बयान के बाद जब पुलिस ने कड़ाई से तफ्तीश की, तो आर्या के झूठ का महल ढह गया और पूरी साजिश बेनकाब हो गई।
वर्तमान में पुलिस ने इस प्रकरण में संलिप्त सभी आरोपियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। एक पुलिसकर्मी पिता की हत्या में उसकी अपनी पुलिसकर्मी बेटी की संलिप्तता ने विभाग की साख पर भी गहरे प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। यह घटना मात्र एक अपराध नहीं, बल्कि आधुनिक समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और अनियंत्रित आवेग का एक भयावह दृष्टांत है। कानून अब अपना काम कर रहा है, लेकिन चंद्रपुर की जनता के लिए आज भी यह विश्वास कर पाना कठिन है कि कोई संतान इतनी निष्ठुर कैसे हो सकती है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
